USIranTalks – होर्मुज क्षेत्र में बढ़े तनाव के बीच जारी है शांति वार्ता
USIranTalks – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण माहौल के बीच एक बार फिर सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। शांति वार्ता जारी रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी सेना ने पिछले 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास स्थित एक ईरानी सैन्य ठिकाने पर दूसरी बार कार्रवाई की है। ईरान ने इस कदम को संघर्षविराम का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती है। दूसरी तरफ अमेरिका का दावा है कि यह हमला ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की हालिया गतिविधियों के जवाब में किया गया। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, पिछले 24 घंटों में ईरानी ड्रोन, मिसाइल और तेज रफ्तार नौकाओं की गतिविधियां बढ़ी थीं, जिससे सुरक्षा खतरा पैदा हो रहा था।
शांति समझौते की बातचीत जारी
तनावपूर्ण हालात के बीच दोनों देशों के बीच बातचीत भी जारी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में कहा कि समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति हो रही है। उनके अनुसार, दोनों पक्षों के बीच अब केवल कुछ शब्दों और शर्तों पर मतभेद बाकी हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर वार्ता सफल रहती है तो आने वाले दिनों में संघर्ष खत्म करने को लेकर औपचारिक घोषणा की जा सकती है। हालांकि मौजूदा सैन्य गतिविधियों ने वार्ता की प्रक्रिया को और संवेदनशील बना दिया है।
फरवरी से जारी है टकराव
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी। उस समय अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य अभियान के तहत ईरान से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया था। इसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और कई बार प्रत्यक्ष सैन्य प्रतिक्रिया देखने को मिली।
अप्रैल 2026 से अस्थायी संघर्षविराम लागू किया गया था, लेकिन दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं। होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
ड्रोन और मिसाइल हमलों को लेकर आरोप
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान की तरफ से सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी गईं और समुद्री मार्गों के आसपास संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं। अमेरिका का दावा है कि कुछ ड्रोन और नौकाएं समुद्री सुरंगें बिछाने में सक्षम थीं, जो जहाजों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थीं।
वहीं ईरान की तरफ से कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने संघर्षविराम का सम्मान नहीं किया। IRGC ने दावा किया कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया और एक लड़ाकू विमान को क्षेत्र से पीछे हटने पर मजबूर किया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
वार्ता में नई शर्तों से बढ़ा विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के दौरान कुछ नई शर्तें भी सामने रखी हैं। इनमें क्षेत्रीय शांति समझौतों में कुछ मुस्लिम देशों की भागीदारी और ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को लेकर सख्त प्रस्ताव शामिल हैं।
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम स्टॉक को अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सौंपे या उसे नष्ट करे। ईरान इस मुद्दे पर अब तक सहमत नहीं दिख रहा है। इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व की ओर से भी अमेरिका को चेतावनी भरे संदेश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो होर्मुज का महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग दोबारा पूरी तरह खुल सकता है, जिसका असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ेगा।