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KarnatakaPolitics – दिल्ली बैठकों के बीच सिद्धारमैया ने रखा नया राजनीतिक प्रस्ताव

KarnatakaPolitics – कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर राज्य की राजनीतिक दिशा को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत की। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में राज्य में नई सरकार के गठन के साथ-साथ राज्यसभा और विधान परिषद की आगामी सीटों को लेकर भी विचार-विमर्श होने की जानकारी सामने आई है।

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नेतृत्व परिवर्तन के बाद भी बरकरार राजनीतिक प्रभाव

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बावजूद सिद्धारमैया का प्रभाव कर्नाटक कांग्रेस में कायम है। 77 वर्षीय नेता लंबे समय से राज्य की राजनीति का अहम चेहरा रहे हैं और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर उनकी पहचान मजबूत रही है। कांग्रेस संगठन के भीतर भी उन्हें अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। यही वजह है कि राज्य में किसी भी बड़े राजनीतिक निर्णय में उनकी भूमिका को नजरअंदाज करना आसान नहीं माना जा रहा।

राज्यसभा प्रस्ताव ठुकराने के बाद नई भूमिका की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, पार्टी की ओर से उन्हें राज्यसभा भेजने का विकल्प भी दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसमें रुचि नहीं दिखाई। बताया जा रहा है कि उनकी प्राथमिकता कर्नाटक की सक्रिय राजनीति में बने रहने की है। इसी क्रम में उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने एक समन्वय समिति के गठन का सुझाव रखा है, जो सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का काम करे।

समन्वय समिति के प्रस्ताव पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सिद्धारमैया ने ऐसी समिति बनाने का प्रस्ताव दिया है जो सरकार के कामकाज और पार्टी संगठन के बीच संवाद का माध्यम बने। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार के दौरान भी उन्होंने इसी तरह की व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य शासन और संगठन के बीच समन्वय को मजबूत करना है।

नई सरकार में प्रभाव बनाए रखने की अटकलें

राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि इस तरह की समिति से सिद्धारमैया राज्य की राजनीति में अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखना चाहते हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि इससे सरकार के प्रमुख फैसलों पर उनकी सलाह और प्रभाव जारी रह सकता है। हालांकि इस संबंध में कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।

दिल्ली बैठकों में रखी गईं अन्य मांगें

दिल्ली में हुई चर्चाओं के दौरान सिद्धारमैया ने संगठन और सरकार से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उन्होंने अपने समर्थक नेताओं को नई सरकार और मंत्रिमंडल में उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग भी रखी है। इनमें उनके पुत्र यतींद्र सहित कुछ करीबी नेताओं के नामों की भी चर्चा हो रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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