Iran Deal – अमेरिका और ईरान के बीच समझौते पर बनी अनिश्चितता
Iran Deal – अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर जारी कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद अभी तक किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में कई बार संकेत दिए थे कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है, लेकिन शुक्रवार को हुई अहम बैठक के बाद भी अंतिम निर्णय सामने नहीं आया। इससे स्पष्ट है कि कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अभी दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

व्हाइट हाउस में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद भी समझौते को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी। इस बीच ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वार्ताएं जारी हैं, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी बाकी है।
व्हाइट हाउस की बैठक में नहीं बन सकी सहमति
शुक्रवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक से पहले उन्होंने संकेत दिया था कि जल्द ही महत्वपूर्ण फैसला लिया जा सकता है, लेकिन लगभग दो घंटे तक चली बातचीत के बाद भी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई।
अमेरिकी प्रशासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति केवल ऐसे प्रस्ताव को मंजूरी देंगे जो राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के अनुरूप हो और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को प्रभावी रूप से सीमित करने की दिशा में ठोस आश्वासन प्रदान करे।
युद्धविराम बढ़ाने पर चल रही चर्चा
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच एक प्रारंभिक समझ बन सकती है। इस प्रस्ताव के तहत मौजूदा युद्धविराम को लगभग 60 दिनों तक बढ़ाने और परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई वार्ताओं की शुरुआत करने पर विचार किया जा रहा था।
हालांकि, दोनों देशों की आधिकारिक टिप्पणियों से यह स्पष्ट हुआ है कि प्रस्तावित समझौते के कई पहलुओं पर अभी भी चर्चा जारी है। यही वजह है कि कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना अहम मुद्दा
बातचीत के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी शामिल है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए इस मार्ग को पूरी तरह खुला रखा जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी दोहराया कि क्षेत्र में नौवहन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समुद्री खतरों को हटाना आवश्यक है। अमेरिका लंबे समय से इस जलमार्ग में निर्बाध आवाजाही की वकालत करता रहा है।
ईरान ने जताया अविश्वास
दूसरी ओर, ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल आश्वासनों के आधार पर आगे बढ़ना उनके लिए संभव नहीं होगा। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि पिछले वर्षों की घटनाओं के कारण विश्वास का संकट बना हुआ है और किसी भी समझौते के लिए व्यावहारिक कदम जरूरी होंगे।
ईरान के प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने कहा कि उनका देश केवल वास्तविक कार्रवाई को महत्व देता है। उनके अनुसार, भविष्य की किसी भी प्रक्रिया में दोनों पक्षों को समान रूप से अपने दायित्वों का पालन करना होगा।
अभी कई मुद्दों पर बनी हुई है दूरी
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी कहा है कि बातचीत जारी है, लेकिन समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्रीय तनाव कम करने और संघर्ष से जुड़े मुद्दों पर है।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान चाहता है कि संभावित समझौते में क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े अन्य विषयों को भी शामिल किया जाए। साथ ही वह विदेशों में रोकी गई अपनी वित्तीय संपत्तियों तक पहुंच बहाल करने की मांग भी उठा रहा है।
आगे की वार्ताओं पर टिकी नजरें
दोनों देशों की ओर से आए बयानों से स्पष्ट है कि बातचीत पूरी तरह रुकी नहीं है, लेकिन अंतिम सहमति तक पहुंचने के लिए अभी और दौर की चर्चा आवश्यक होगी। वैश्विक समुदाय भी इस प्रक्रिया पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।