TerrorNetwork – कराची में छिपे दाऊद के करीबी मुन्ना झिंगड़ा पर फिर बढ़ी चर्चा
TerrorNetwork – हाल ही में दिल्ली और मुंबई समेत कई बड़े शहरों में संभावित आतंकी गतिविधियों से जुड़े नौ संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद अंडरवर्ल्ड और आतंक नेटवर्क से जुड़े एक पुराने नाम मुन्ना झिंगड़ा की चर्चा फिर तेज हो गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, दाऊद इब्राहिम का करीबी माना जाने वाला यह व्यक्ति फिलहाल पाकिस्तान के कराची में रह रहा है। सुरक्षा सूत्रों का दावा है कि वह भारत के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिशों से जुड़ा रहा है।

दाऊद गिरोह का भरोसेमंद सदस्य माना जाता है
मुन्ना झिंगड़ा, जिसका मूल नाम सैयद मुदस्सुर हुसैन बताया जाता है, मुंबई के जोगेश्वरी इलाके का रहने वाला रहा है। उसे लंबे समय तक दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क का सक्रिय सदस्य माना गया। जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार वह छोटा शकील के निर्देशों पर भी काम करता था और अंडरवर्ल्ड की कई गतिविधियों में उसका नाम सामने आया था।
बैंकॉक में छोटा राजन पर हमले के बाद हुई गिरफ्तारी
साल 2000 में थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में छोटा राजन पर हुए हमले के बाद मुन्ना झिंगड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था। आरोप था कि उसने राजन के ठिकाने पर गोलीबारी की थी। इस हमले में छोटा राजन बच निकला, लेकिन उसके सहयोगी रोहित वर्मा की मौत हो गई थी। घटना के बाद थाईलैंड पुलिस ने झिंगड़ा को गिरफ्तार कर लिया था।
प्रत्यर्पण को लेकर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने
गिरफ्तारी के बाद थाईलैंड की अदालत में झिंगड़ा की नागरिकता और प्रत्यर्पण को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कानूनी विवाद शुरू हो गया। भारत ने अदालत में दावा किया कि वह भारतीय नागरिक है और उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। भारतीय पक्ष ने उसके परिवार से जुड़े दस्तावेज, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और डीएनए जांच रिपोर्ट जैसे साक्ष्य भी प्रस्तुत किए थे।
पाकिस्तान ने भी पेश किए अपने दावे
दूसरी ओर पाकिस्तान ने अदालत में दावा किया कि झिंगड़ा उसका नागरिक है और उसका नाम मोहम्मद सलीम है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसके नाम से पाकिस्तानी पासपोर्ट भी पेश किया गया। इस मामले में कई वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही और अंततः थाईलैंड की उच्च अदालत ने पाकिस्तान के दस्तावेजों को स्वीकार करते हुए उसे पाकिस्तान भेजने का फैसला सुनाया।
सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में आया नाम
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, भारतीय एजेंसियां लंबे समय से झिंगड़ा और उसके कथित सहयोगियों की गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। हाल की जांच में उसका नाम फिर सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह पाकिस्तान में बैठे कुछ अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर भारत के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजनाओं से जुड़ा हुआ था।
कथित साजिश का समय रहते खुलासा
जांच एजेंसियों का कहना है कि हाल में की गई कार्रवाई के दौरान एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जिसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों, हवाई अड्डों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य संवेदनशील स्थानों को नुकसान पहुंचाना था। अधिकारियों के मुताबिक, समय रहते मिली जानकारी और कार्रवाई के कारण इन योजनाओं को आगे बढ़ने से रोक दिया गया।