झारखण्ड

RajyaSabhaElection – झारखंड की दो सीटों पर सियासी गणित बना चर्चा का विषय

RajyaSabhaElection – झारखंड में राज्यसभा की दो रिक्त सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने दावे कर रहे हैं। हालांकि विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए मुकाबले की दिशा काफी हद तक स्पष्ट दिखाई दे रही है। राज्य में एक सीट पूर्व सांसद के निधन के कारण खाली हुई है, जबकि दूसरी सीट का कार्यकाल पूरा होने के बाद चुनाव कराया जा रहा है।

jharkhand rajya sabha election equation analysis

राजनीतिक दलों के बीच उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन असली नजर विधानसभा के अंकगणित पर टिकी हुई है। इसी संख्या बल के आधार पर चुनावी तस्वीर तय होने की संभावना जताई जा रही है।

एक सीट के लिए कितने मतों की जरूरत

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए निर्धारित संख्या में विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है। झारखंड विधानसभा की वर्तमान स्थिति के अनुसार एक उम्मीदवार को विजयी होने के लिए 28 मतों की आवश्यकता होगी। यही आंकड़ा चुनावी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास बहुमत से कहीं अधिक सदस्य हैं। इसी वजह से राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सहयोगी दलों के बीच एकजुटता बनी रहती है तो दोनों सीटों पर उनका दावा मजबूत रहेगा।

सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति मजबूत

वर्तमान विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी झारखंड मुक्ति मोर्चा की है, जबकि कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दल भी गठबंधन का हिस्सा हैं।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के बीच सीटों को लेकर सहमति बन चुकी है। यदि ऐसा होता है तो एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा और दूसरी पर कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं। इस स्थिति में गठबंधन के पास दोनों प्रत्याशियों को जिताने लायक पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।

विपक्षी गठबंधन के सामने चुनौती

दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन के पास विधानसभा में अपेक्षाकृत कम संख्या है। भाजपा इसके प्रमुख घटक के रूप में मौजूद है, जबकि अन्य सहयोगी दलों का भी सीमित प्रतिनिधित्व है।

वर्तमान गणित के अनुसार विपक्ष के पास जीत के लिए आवश्यक मतों से कम विधायक हैं। यही कारण है कि चुनावी मुकाबले में उसकी राह आसान नहीं मानी जा रही। हालांकि विपक्षी दल अभी भी अपनी संभावनाओं को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं और एक सीट पर बेहतर प्रदर्शन का दावा कर रहे हैं।

क्रॉस वोटिंग पर भी रहेगी नजर

राज्यसभा चुनाव में अक्सर संख्या बल के साथ-साथ राजनीतिक रणनीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में सभी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हुए हैं। चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग या अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

हालांकि अब तक किसी बड़े असंतोष या टूट-फूट के संकेत सामने नहीं आए हैं। यदि सभी विधायक अपने-अपने दलों के निर्देशों के अनुसार मतदान करते हैं तो परिणाम वर्तमान संख्या बल के अनुरूप ही रहने की संभावना है।

चुनावी नतीजों पर टिकी राजनीतिक नजरें

राज्यसभा चुनाव केवल संसद के उच्च सदन में प्रतिनिधित्व तय करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह विधानसभा में दलों की वास्तविक राजनीतिक ताकत का भी संकेत देता है। इसी वजह से झारखंड का यह चुनाव राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा और चुनाव प्रचार के साथ राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। फिलहाल विधानसभा के मौजूदा आंकड़े सत्तारूढ़ गठबंधन को बढ़त देते दिखाई दे रहे हैं, जबकि विपक्ष चुनावी समीकरण बदलने की संभावनाएं तलाश रहा है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.