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TurkeyRelations – पाकिस्तान से रिश्तों पर तुर्की का पक्ष, भारत से सहयोग की जताई उम्मीद…

TurkeyRelations – भारत और तुर्की के संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत और पाकिस्तान से जुड़े सवालों पर अपनी सरकार का दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि तुर्की भारत के साथ सकारात्मक और सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं पाकिस्तान के साथ उसके ऐतिहासिक और करीबी रिश्ते भी जारी रहेंगे।

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हाकन फिदान ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और तुर्की के बीच कोई प्रत्यक्ष सीमा विवाद या बड़ा द्विपक्षीय मतभेद नहीं है। उनके अनुसार, दोनों देशों के पास आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने के कई अवसर मौजूद हैं।

भारत के साथ बेहतर संबंधों की बात

इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटजिक स्टडीज (IISS) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए तुर्की के विदेश मंत्री ने कहा कि अंकारा नई दिल्ली के साथ संबंधों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐसा कोई ऐतिहासिक विवाद नहीं है जो रिश्तों में स्थायी बाधा बने।

फिदान के अनुसार, भारत और तुर्की आर्थिक, व्यापारिक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मतभेदों के बजाय साझा हितों पर ध्यान देना अधिक उपयोगी होगा।

पाकिस्तान से संबंधों का किया बचाव

अपने संबोधन में तुर्की के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के साथ अपने देश के संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तुर्की अकेला ऐसा देश नहीं है जिसके पाकिस्तान के साथ घनिष्ठ रिश्ते हैं। दुनिया के कई देशों के इस्लामाबाद के साथ ऐतिहासिक, राजनीतिक और रणनीतिक संबंध रहे हैं।

उन्होंने कहा कि किसी देश के साथ अच्छे संबंध रखने का अर्थ यह नहीं है कि दूसरे देशों के साथ रिश्ते प्रभावित हों। फिदान ने संकेत दिया कि तुर्की भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अलग-अलग स्तर पर अपने संबंध बनाए रखना चाहता है।

मतभेदों से आगे बढ़ने का संदेश

हाकन फिदान ने अपने वक्तव्य में विभिन्न देशों के साथ तुर्की के संबंधों का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि तुर्की के कुछ मुद्दों पर रूस, अमेरिका और कई यूरोपीय देशों के साथ मतभेद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद सहयोग के क्षेत्रों को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रहता है।

उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में केवल विवादों पर ध्यान देने के बजाय साझा हितों और विकास के अवसरों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी सोच के साथ भारत और तुर्की के रिश्तों को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।

सुरक्षा मामलों को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल

भारत और तुर्की के संबंधों में हाल के वर्षों में कुछ सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में पहले यह दावा किया गया था कि पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग बढ़ा है। इन रिपोर्टों में ड्रोन तकनीक और सैन्य सहयोग से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया था।

हालांकि इन मामलों पर संबंधित देशों की ओर से समय-समय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। आधिकारिक स्तर पर दोनों देशों ने अपने-अपने रुख स्पष्ट किए हैं।

क्षेत्रीय घटनाओं के बाद बढ़ी कूटनीतिक सक्रियता

पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण एशिया के सुरक्षा परिदृश्य में कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने मई 2026 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस अभियान के तहत सुरक्षा बलों ने आतंकवादी ढांचों के खिलाफ कार्रवाई की थी।

इन घटनाओं के बाद क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हुईं। ऐसे माहौल में तुर्की के विदेश मंत्री का यह बयान भारत-तुर्की संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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