CrowdManagement – रांची स्टेडियम में फाइनल मैच के दौरान मची अफरातफरी
CrowdManagement – झारखंड टी-20 प्रीमियर लीग के फाइनल मुकाबले के दौरान रांची स्थित जेएससीए स्टेडियम में मंगलवार को दर्शकों की भारी भीड़ के बीच अव्यवस्था फैल गई, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस घटना में कई लोग घायल हुए, जिनमें कुछ को गंभीर चोटें आने के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रित किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ पहुंचने और प्रवेश व्यवस्था में कमी के कारण यह घटना हुई।

मुफ्त प्रवेश से उम्मीद से कहीं ज्यादा पहुंची भीड़
स्थानीय लोगों के मुताबिक, मैच देखने के लिए प्रवेश शुल्क नहीं रखा गया था, जिसके चलते बड़ी संख्या में क्रिकेट प्रेमी स्टेडियम पहुंचे। अनुमान है कि 30 हजार से अधिक दर्शक मुकाबला देखने के लिए पहुंचे थे। भीड़ का दबाव लगातार बढ़ता गया और स्टेडियम के बाहर लंबी कतारें लग गईं। कई घायलों को राज अस्पताल, पारस अस्पताल, सदर अस्पताल और अन्य नजदीकी चिकित्सा केंद्रों में उपचार के लिए ले जाया गया।
प्रवेश द्वारों पर बढ़ता गया दबाव
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दर्शकों को लंबे समय तक गेट के बाहर इंतजार करना पड़ा। जैसे-जैसे समय बीतता गया, भीड़ में बेचैनी बढ़ने लगी। पश्चिमी प्रवेश द्वार के पास हालात तब और बिगड़ गए जब कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग को नुकसान पहुंचाकर अंदर जाने की कोशिश की। इसके बाद वहां धक्का-मुक्की शुरू हो गई और बड़ी संख्या में लोग एक साथ आगे बढ़ने लगे।
कई स्थानों पर बनी अव्यवस्था की स्थिति
स्टेडियम के अन्य प्रवेश द्वारों के आसपास भी भीड़ का दबाव देखने को मिला। उत्तर दिशा के गेट और दक्षिणी पवेलियन क्षेत्र के आसपास भी लोगों की संख्या लगातार बढ़ती रही। जब एक प्रवेश द्वार खोला गया तो बड़ी संख्या में दर्शक एक साथ अंदर जाने लगे। इसी दौरान कुछ लोग संतुलन खोकर गिर पड़े, जिससे अफरातफरी का माहौल बन गया। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार, महिलाओं और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सीमित गेट और धीमी जांच प्रक्रिया बनी वजह
रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने बताया कि दर्शकों की एंट्री के लिए सीमित संख्या में गेट संचालित किए जा रहे थे। दूसरी ओर, सुरक्षा जांच की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी थी, जिससे प्रवेश द्वारों पर भीड़ लगातार बढ़ती गई। अधिकारियों के अनुसार, अचानक बढ़ी दर्शकों की संख्या ने व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया, जिसके कारण हालात संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
घटना के बाद कई दर्शकों ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों का कहना है कि फाइनल जैसे बड़े मुकाबले के लिए अधिक प्रवेश द्वार खोले जाने चाहिए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्टेडियम के बाहर मौजूद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था नजर नहीं आई। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि अफरातफरी के दौरान उनके मोबाइल फोन और अन्य सामान भी गायब हो गए।
प्रशासन ने शुरू की स्थिति की समीक्षा
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घायल लोगों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है और भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन को और बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदमों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल स्थिति सामान्य है और मामले से जुड़ी सभी परिस्थितियों की जांच की जा रही है।