CrimeCase – शेफील्ड यौन शोषण मामले में तीन भाइयों को मिली सजा
CrimeCase – ब्रिटेन के शेफील्ड शहर में वर्षों पुराने यौन शोषण मामले में अदालत ने तीन सगे भाइयों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह मामला 2004 से 2007 के बीच कई नाबालिग लड़कियों और एक महिला के साथ हुए गंभीर अपराधों से जुड़ा है। अदालत के फैसले के बाद लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे पीड़ितों को कानूनी राहत मिली है। मामले का मुख्य आरोपी सुनवाई पूरी होने से पहले ही पाकिस्तान चला गया था, जिसके चलते उसे अदालत ने अनुपस्थिति में सजा सुनाई।

कई पीड़ितों के साथ अपराध साबित
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने 41 वर्षीय अमर इलियास, 39 वर्षीय कमर इलियास और 38 वर्षीय कामरान इलियास को विभिन्न यौन अपराधों का दोषी पाया। जांच में सामने आया कि अपराधों के समय पीड़ितों की आयु 12 से 18 वर्ष के बीच थी।
अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, बड़े भाई अमर इलियास को पांच अलग-अलग पीड़ितों से जुड़े अनेक गंभीर अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया। वहीं उसके दोनों भाइयों को भी एक नाबालिग पीड़िता से जुड़े यौन अपराधों में जिम्मेदार पाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने विस्तृत साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए थे।
अदालत ने सुनाई अलग-अलग सजाएं
शेफील्ड क्राउन कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए अमर इलियास को 27 वर्ष की जेल की सजा दी। चूंकि वह वर्तमान में ब्रिटेन में मौजूद नहीं है, इसलिए यह सजा उसकी अनुपस्थिति में सुनाई गई। अदालत ने उसकी गिरफ्तारी के लिए वारंट भी जारी किया है।
दूसरे आरोपी कमर इलियास को 10 वर्ष की कैद और कामरान इलियास को 3 वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश पीटर हैम्पटन ने मुख्य आरोपी के व्यवहार को बेहद गंभीर बताते हुए उसे समाज के लिए खतरनाक व्यक्ति करार दिया।
विशेष जांच अभियान के तहत सामने आया मामला
यह मामला नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) की विशेष जांच पहल “ऑपरेशन स्टोववुड” के तहत सामने आया था। इस अभियान का उद्देश्य संगठित यौन शोषण से जुड़े पुराने मामलों की जांच करना था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अपराधों के समय आरोपी किशोरावस्था के अंतिम चरण या शुरुआती युवावस्था में थे। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान कई पीड़ितों के बयान और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए गए, जिनके आधार पर अदालत में मामला मजबूत हुआ।
पीड़ितों ने साझा किए अपने अनुभव
सुनवाई के दौरान कई पीड़ितों ने अदालत में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वर्षों बाद भी वे उस मानसिक आघात के प्रभाव से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए हैं। कुछ पीड़ितों ने कहा कि इस घटना ने उनके व्यक्तिगत जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संबंधों पर गहरा असर डाला।
एक महिला ने अदालत को बताया कि घटना की यादें आज भी उसे परेशान करती हैं और वह लंबे समय तक भय और तनाव से जूझती रही। दूसरी पीड़िता ने कहा कि घटना के समय वह बहुत कम उम्र की थी और उस अनुभव ने उसके जीवन की दिशा बदल दी।
न्यायिक प्रक्रिया को बताया महत्वपूर्ण कदम
मामले में फैसला आने के बाद जांच एजेंसियों ने इसे पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण न्यायिक उपलब्धि बताया है। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर अपराधों के मामलों में समय बीत जाने के बावजूद जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है।
अदालत के फैसले ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पीड़ितों की गवाही और साक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाते हैं। फिलहाल मुख्य आरोपी की तलाश जारी है और कानून प्रवर्तन एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही हैं।