स्वास्थ्य

Stress Relief – जीभ बाहर निकालने वाली तकनीक पर बढ़ी चर्चा, जानें क्या है लाभ…

Stress Relief – हाल के दिनों में सोशल मीडिया और स्वास्थ्य संबंधी चर्चाओं में एक दिलचस्प अभ्यास को लेकर काफी बातें हो रही हैं। इसमें कुछ सेकंड तक जीभ को बाहर निकालकर रखने की सलाह दी जाती है। इस तकनीक को लेकर दावा किया जा रहा है कि इससे तनाव कम करने और शरीर को आराम की स्थिति में लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे किसी भी अभ्यास के प्रभाव व्यक्ति-विशेष पर निर्भर कर सकते हैं और इसे किसी चिकित्सीय उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

tongue technique for stress relief

इस विषय पर चर्चा तब तेज हुई जब एक न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने एक मरीज को प्रतिदिन कुछ समय तक यह अभ्यास करने की सलाह दी थी। उनके अनुसार, कुछ सप्ताह बाद मरीज के तनाव से जुड़े संकेतकों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। हालांकि, यह व्यक्तिगत अनुभव है और इसे व्यापक वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

तनाव और शरीर के बीच संबंध

विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर की कई मांसपेशियां लगातार तनावग्रस्त बनी रह सकती हैं। गर्दन, कंधे और जबड़े के आसपास का हिस्सा विशेष रूप से प्रभावित होता है। यही कारण है कि तनाव की स्थिति में लोगों को अकड़न, थकान या बेचैनी महसूस हो सकती है।

कुछ शोध यह संकेत देते हैं कि चेहरे, गर्दन और श्वसन से जुड़ी मांसपेशियों को नियंत्रित तरीके से सक्रिय करने वाले अभ्यास शरीर की विश्राम प्रतिक्रिया को बढ़ावा दे सकते हैं। इसी संदर्भ में जीभ बाहर निकालने वाली तकनीक को भी देखा जा रहा है।

कैसे काम कर सकती है यह तकनीक

इस अभ्यास के समर्थकों का मानना है कि जीभ को पूरी तरह बाहर निकालने से चेहरे, जबड़े और गर्दन के कुछ हिस्सों में खिंचाव पैदा होता है। इससे मांसपेशियों में जकड़न कम होने और शरीर को आराम का संकेत मिलने की संभावना रहती है।

कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऐसे अभ्यासों का प्रभाव केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक भी हो सकता है। जब कोई व्यक्ति कुछ क्षणों के लिए रुककर अपनी सांसों और शरीर पर ध्यान केंद्रित करता है, तो तनाव का स्तर स्वाभाविक रूप से कम महसूस हो सकता है। हालांकि, इस विषय पर और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई जाती है।

40 सेकंड की अवधि को लेकर क्या है तर्क

इस तकनीक से जुड़े कुछ विशेषज्ञ 40 सेकंड तक जीभ बाहर रखने की सलाह देते हैं। उनका तर्क है कि शुरुआती कुछ सेकंड में शरीर सामान्य प्रतिक्रिया देता है, जबकि अधिक समय तक स्थिति बनाए रखने पर मांसपेशियां धीरे-धीरे ढीली पड़ सकती हैं।

फिर भी, चिकित्सा विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि 40 सेकंड की अवधि को लेकर कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक मानक उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग व्यक्तियों के लिए आरामदायक समय अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी अभ्यास को करते समय शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान देना जरूरी है।

योग में भी मिलता है समान अभ्यास

भारतीय योग परंपरा में सिंहासन या सिंह मुद्रा नामक एक आसन का उल्लेख मिलता है, जिसमें व्यक्ति जीभ बाहर निकालकर विशेष श्वास तकनीक के साथ अभ्यास करता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, यह आसन मानसिक तनाव कम करने, चेहरे की मांसपेशियों को सक्रिय करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

हालांकि, योग और आधुनिक चिकित्सा दोनों क्षेत्रों के विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए केवल ऐसे अभ्यासों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। यदि तनाव, चिंता या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां लगातार बनी रहें, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव कम करने के लिए नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, ध्यान और श्वास संबंधी अभ्यास अधिक प्रभावी और व्यापक रूप से स्वीकार किए गए तरीके हैं। जीभ बाहर निकालने जैसी तकनीकें कुछ लोगों के लिए सहायक अनुभव हो सकती हैं, लेकिन इनके लाभों को लेकर अभी और शोध की जरूरत है।

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