Governance – बारह वर्षों में फैसलों और योजनाओं से बदली शासन की तस्वीर
Governance – केंद्र में पिछले बारह वर्षों के दौरान शासन और प्रशासन की कार्यशैली में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। इस अवधि में लिए गए अनेक फैसलों, योजनाओं और नीतिगत सुधारों ने देश की राजनीतिक तथा प्रशासनिक दिशा को प्रभावित किया है। सरकार का दावा रहा है कि उसकी प्राथमिकता केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्हें समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारना भी प्रमुख लक्ष्य रहा है।

विभिन्न क्षेत्रों में लागू की गई नीतियों और सुधारों को लेकर समर्थक इन्हें परिवर्तनकारी कदम बताते हैं, जबकि इन पर राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर व्यापक चर्चा भी होती रही है।
कार्यान्वयन आधारित प्रशासन पर रहा जोर
प्रशासनिक हलकों में अक्सर यह चर्चा होती रही है कि सरकार ने योजनाओं के क्रियान्वयन को विशेष महत्व दिया। पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, शीर्ष स्तर पर परियोजनाओं की प्रगति और समय पर पूरा होने पर लगातार निगरानी रखी गई। यही वजह रही कि कई बड़े बुनियादी ढांचा और कल्याणकारी कार्यक्रम निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाए गए।
सरकारी तंत्र में परिणाम आधारित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की कोशिश भी इसी दौर में प्रमुखता से देखने को मिली।
नौकरशाही को दिया गया जवाबदेही का संदेश
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, शासन के शुरुआती वर्षों में अधिकारियों को निर्णय लेने में सक्रिय भूमिका निभाने और समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया गया। इसका उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज करना और नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था।
सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया, जिससे कई परियोजनाओं की गति बढ़ाने में मदद मिली।
जम्मू-कश्मीर से जुड़े फैसले रहे चर्चा में
इस अवधि के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णयों में जम्मू-कश्मीर से संबंधित संवैधानिक बदलाव शामिल रहे। केंद्र सरकार ने विशेष प्रावधानों को समाप्त करते हुए राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव किया। इस फैसले पर देशभर में व्यापक बहस हुई और इसे हाल के वर्षों के सबसे बड़े राजनीतिक निर्णयों में गिना गया।
सरकार का तर्क था कि इससे विकास और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को नई दिशा मिलेगी।
महिलाओं से जुड़े कानूनों पर भी रहा फोकस
महिलाओं के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी से जुड़े कई कदम भी इस दौरान उठाए गए। तीन तलाक से संबंधित कानून लागू कर तत्काल तलाक की प्रथा को कानूनी अपराध घोषित किया गया। इसके अलावा संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने वाले नारी शक्ति वंदन अधिनियम को भी मंजूरी दी गई।
इन पहलों को महिलाओं की भागीदारी और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का विस्तार
सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता देने का प्रयास किया। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध कराया गया।
कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई मुफ्त खाद्यान्न योजना भी लंबे समय तक जारी रही। इसका लाभ देश के करोड़ों लोगों तक पहुंचा और इसे सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी प्रमुख योजनाओं में शामिल किया जाता है।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान
आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर भी सरकार ने नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा और विकास आधारित रणनीति अपनाने पर जोर दिया। केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों के जरिए कई क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में सुधार की बात कही गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित जिलों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।
कर व्यवस्था में बड़े सुधार
आर्थिक क्षेत्र में वस्तु एवं सेवा कर यानी GST को लागू करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसके जरिए विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को एकीकृत करने का प्रयास किया गया। सरकार का कहना है कि इससे कर प्रणाली अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनी, जबकि व्यापारिक प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की दिशा में काम हुआ।