Ram Temple Donation – चढ़ावे को लेकर उठे सवालों के बीच नए दावे सामने आए
Ram Temple Donation – अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी के बीच मंदिर प्रशासन से जुड़े रहे एक पूर्व अधिकारी के दावों ने बहस को नया मोड़ दे दिया है। हालांकि मंदिर ट्रस्ट और संबंधित पक्ष पहले ही ऐसे आरोपों से इनकार कर चुके हैं, लेकिन सामने आए नए बयानों ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

पूर्व लेखा प्रभारी होने का दावा करने वाले महिपाल सिंह ने विभिन्न मीडिया मंचों पर बातचीत के दौरान दान राशि की गणना प्रक्रिया और उसके संचालन को लेकर कई सवाल उठाए हैं। उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
दान की गिनती प्रक्रिया को लेकर लगाए आरोप
महिपाल सिंह का कहना है कि मंदिर परिसर में दान की गणना के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई थी, जहां निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे। उनके अनुसार, नकद दान की गिनती निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती थी और इसमें बैंक कर्मियों के साथ अन्य कर्मचारी भी शामिल रहते थे।
उन्होंने दावा किया कि गिनती के दौरान नोटों की गड्डियां तैयार की जाती थीं और बाद में उन्हें अलग-अलग पैकेटों में रखा जाता था। उनके अनुसार, इसी प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताओं की संभावना बनी रहती थी।
अतिरिक्त राशि मिलने का किया दावा
पूर्व अधिकारी ने कहा कि एक अवसर पर उन्हें प्रक्रिया पर संदेह हुआ, जिसके बाद एक बॉक्स की दोबारा जांच कराई गई। उनका दावा है कि जांच के दौरान उसमें दर्ज राशि से अधिक नकदी मिली थी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने तत्काल संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी थी।
हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज या जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की जा सकती।
शिकायत के बाद बदली गई जिम्मेदारी
महिपाल सिंह का यह भी कहना है कि कथित अनियमितताओं की जानकारी देने के बाद उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और उनकी ओर से उठाए गए सवालों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इन दावों पर मंदिर ट्रस्ट या संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई नई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बहुमूल्य धातुओं के दान पर भी उठाए सवाल
पूर्व अधिकारी ने नकद दान के अलावा सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के संग्रह और रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई कुछ वस्तुओं के रिकॉर्ड और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं थी।
उन्होंने दावा किया कि इस विषय में जानकारी मांगने पर उन्हें सीमित जवाब दिए गए। हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही इस संबंध में कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है।
जांच होने पर सहयोग की बात
महिपाल सिंह ने कहा है कि यदि किसी स्तर पर इस मामले की जांच की जाती है तो वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जो बातें सार्वजनिक की हैं, वे उनके व्यक्तिगत अनुभव और अवलोकन पर आधारित हैं।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
मामले में कुछ अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की सत्यता की पुष्टि अभी तक किसी स्वतंत्र या आधिकारिक जांच से नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की ओर से भी विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल यह मामला दावों और आरोपों तक सीमित है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच, दस्तावेजी साक्ष्य और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाएगी।