NiravModi Case – बैंक धोखाधड़ी मामले में अदालत ने बदला अधिकार क्षेत्र
NiravModi Case – भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े एक बैंक धोखाधड़ी मामले में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 321.88 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले को आगे की सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट अदालत में भेजने का आदेश दिया है। यह फैसला जांच एजेंसी द्वारा अदालत को दी गई उस जानकारी के बाद आया, जिसमें कहा गया कि जांच के दौरान बैंक अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े पर्याप्त सबूत नहीं मिले।

यह मामला पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ कंपनियों को प्रदान की गई बैंकिंग सुविधाओं का गलत इस्तेमाल कर वित्तीय नुकसान पहुंचाया गया।
जांच के बाद बदला कानूनी स्वरूप
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि विस्तृत जांच के बावजूद किसी सरकारी कर्मचारी या बैंक अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई योग्य साक्ष्य नहीं मिले हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, अब अंतिम आरोपपत्र केवल निजी व्यक्तियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ दायर किया जाएगा। इसी कारण मामला विशेष अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर माना गया और इसे नियमित आपराधिक मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया गया।
मजिस्ट्रेट अदालत में चलेगी आगे की सुनवाई
विशेष अदालत ने जांच एजेंसी की दलीलों पर विचार करने के बाद मामले को मुंबई स्थित अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत को हस्तांतरित करने का निर्देश दिया। अब इस मामले की सुनवाई भारतीय दंड संहिता से संबंधित प्रावधानों के तहत की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जब किसी मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून लागू नहीं रहता, तब उसकी सुनवाई सामान्य आपराधिक अदालत में की जा सकती है। इसी प्रक्रिया के तहत यह बदलाव किया गया है।
कथित लेनदेन को लेकर उठे थे सवाल
बैंक की आंतरिक जांच में कुछ कंपनियों के बीच वित्तीय लेनदेन के तरीके को लेकर सवाल उठाए गए थे। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि विभिन्न कारोबारी इकाइयों के बीच धन के आवागमन के लिए जटिल वित्तीय लेनदेन किए गए, जिनकी प्रकृति और उद्देश्य की जांच की गई।
मामले में जिन कंपनियों के नाम सामने आए थे, उनमें हीरा कारोबार और निर्यात क्षेत्र से जुड़ी कई संस्थाएं शामिल थीं। जांच एजेंसियों ने इन लेनदेन की प्रकृति और उनके वित्तीय प्रभावों का विश्लेषण किया था।
कई कारोबारी अधिकारी भी हैं आरोपी
इस मामले में नीरव मोदी के अलावा कई अन्य कारोबारी अधिकारियों और कंपनियों के पदाधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। इनमें विभिन्न कंपनियों से जुड़े वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी और निदेशक स्तर के लोग शामिल बताए गए हैं।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि वित्तीय गतिविधियों के जरिए बैंकिंग नियमों का उल्लंघन किया गया और इससे संबंधित संस्थान को नुकसान पहुंचा। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।
बड़े बैंक घोटाले से अलग है यह मामला
यह मामला उस चर्चित बैंक घोटाले से अलग माना जाता है, जिसने देशभर में व्यापक चर्चा बटोरी थी। मुख्य मामले में हजारों करोड़ रुपये के कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अलग से चल रही है और उसमें विभिन्न एजेंसियां शामिल हैं।
वर्तमान मामला अपेक्षाकृत छोटे वित्तीय दायरे से जुड़ा है, लेकिन कानूनी रूप से इसकी अपनी स्वतंत्र जांच और सुनवाई प्रक्रिया जारी है। इसलिए दोनों मामलों को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर भी बनी हुई है नजर
नीरव मोदी इस समय ब्रिटेन में न्यायिक हिरासत में है और भारत सरकार उसके प्रत्यर्पण के लिए कानूनी प्रयास जारी रखे हुए है। पिछले कुछ वर्षों से इस संबंध में विभिन्न स्तरों पर न्यायिक कार्यवाही चल रही है।
इस बीच भारत में दर्ज अलग-अलग मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। अदालत द्वारा हाल में दिया गया आदेश उसी श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जो नीरव मोदी से जुड़े मामलों की दिशा तय कर सकता है।