TenderScam – बिहार में सरकारी ठेकों की जांच में सामने आए नए तथ्य
TenderScam – बिहार में सरकारी ठेकों से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विशेष निगरानी इकाई (SVU) की कार्रवाई के बाद कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसियां विभिन्न विभागों में हुए ठेकों के आवंटन और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही हैं। मामले में कुछ अधिकारियों, इंजीनियरों और एक चर्चित ठेकेदार का नाम जांच के दायरे में आया है।

पुराने मामले से शुरू हुई जांच की कड़ी
जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2023 में पटना के रूपसपुर थाने में दर्ज एक मामले के दौरान पहली बार ठेकेदार रिशुश्री का नाम सामने आया था। बाद में उसी प्रकरण में दर्ज कुछ धाराओं को आधार बनाते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने मार्च 2024 में धन शोधन निवारण कानून के तहत मामला दर्ज किया।
हालांकि मूल मामले में कुछ आरोप बाद में न्यायिक प्रक्रिया के दौरान निरस्त हो गए, लेकिन वित्तीय लेनदेन और सरकारी ठेकों से जुड़े पहलुओं की जांच जारी रही। इसी क्रम में एजेंसी ने कई परिसरों पर तलाशी अभियान भी चलाया।
पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद बढ़ी कार्रवाई
जांच एजेंसियों ने वर्ष 2024 के दौरान संबंधित कंपनी और उससे जुड़े व्यक्तियों से विस्तृत पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान कई दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर सरकारी परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़े कुछ नए बिंदु सामने आए।
इसी दौरान केंद्रीय एजेंसी ने अपने निष्कर्षों से संबंधित जानकारी राज्य की जांच इकाइयों के साथ भी साझा की, जिसके बाद राज्य स्तर पर अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज की गई।
एसवीयू ने दर्ज किए भ्रष्टाचार से जुड़े मामले
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा भेजी गई जानकारी के आधार पर विशेष निगरानी इकाई ने वर्ष 2024 में भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद वर्ष 2025 में मिले एक अन्य पत्र के आधार पर दूसरी जांच भी शुरू की गई।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ सरकारी विभागों में ठेकों के आवंटन की प्रक्रिया के दौरान नियमों के उल्लंघन की आशंका है। इसी संदर्भ में कई अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं।
कई अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में अब तक कुछ अधिकारियों और अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। जांच के दौरान कई सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ भी की गई है। कुछ अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई होने की भी जानकारी सामने आई है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले उपलब्ध दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया जा रहा है।
न्यायिक हिरासत बढ़ाई गई
सरकारी ठेकों से जुड़े इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों को अदालत ने 25 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गुरुवार को सभी आरोपियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष अदालत में हुई।
अदालत की कार्यवाही के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं, जिसके बाद न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाने का आदेश दिया गया। मामले के प्रमुख आरोपी ठेकेदार रिशुश्री समेत अन्य अभियुक्त फिलहाल जेल में हैं। विशेष निगरानी इकाई द्वारा दायर रिमांड आवेदन पर आने वाले दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।
जांच पर बनी हुई नजर
राज्य में सरकारी परियोजनाओं और ठेकों से जुड़े इस मामले पर प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि प्रक्रिया कानून के दायरे में आगे बढ़ रही है और जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।