बिज़नेस

ExportDuty – डीजल और एटीएफ निर्यात शुल्क बढ़ा, सरकार ने दी आपूर्ति की गारंटी

ExportDuty – केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी का फैसला किया है। राजस्व विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर अब 14 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ के निर्यात पर 12.50 रुपये प्रति लीटर की दर से शुल्क वसूला जाएगा। नई दरें मंगलवार से प्रभावी हो चुकी हैं। हालांकि पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है और घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल पर लागू उत्पाद शुल्क भी यथावत रखा गया है।

diesel atf export duty hike india

अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया फैसला

सरकार ने यह व्यवस्था ऐसे समय में जारी रखी है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने और ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से मार्च के अंत से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क अवसंरचना उपकर लागू किया गया था।

इन शुल्कों की नियमित समीक्षा की जाती है ताकि वैश्विक बाजार में होने वाले बदलावों के अनुसार दरों को समायोजित किया जा सके। सरकार हर 15 दिन में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और ईंधन उत्पादों की औसत कीमतों का आकलन कर नई दरें तय करती है। इससे पहले जून की शुरुआत में भी शुल्क संरचना में संशोधन किया गया था।

आम उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा सीधा असर

सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्यात शुल्क में हुई वृद्धि का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। यह कदम केवल निर्यात से जुड़े लेनदेन पर लागू होगा। देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंधन उत्पादों की खुदरा कीमतों या कर संरचना में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदमों का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच आपूर्ति श्रृंखला को संतुलित रखना होता है।

ईंधन उपलब्धता को लेकर मंत्रालय का बयान

इसी बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देशभर में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता होने का भरोसा दिलाया है। मंत्रालय का कहना है कि सभी रिफाइनरियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं और आपूर्ति तंत्र में किसी प्रकार की व्यापक बाधा नहीं है।

एक प्रेस वार्ता के दौरान मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने उद्योग जगत और आम नागरिकों से ऊर्जा संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को सलाह दी कि वे अपनी निर्धारित आपूर्ति व्यवस्था का उपयोग करें, ताकि खुदरा पेट्रोल पंपों पर अनावश्यक दबाव न बढ़े।

रिटेल आउटलेट्स पर बढ़ा था दबाव

मंत्रालय के अनुसार हाल के महीनों में ईंधन खपत के पैटर्न में बदलाव देखने को मिला है। मई के दौरान बड़ी मात्रा में डीजल की खरीद उन उपभोक्ताओं द्वारा खुदरा पंपों से की गई, जो सामान्यतः बल्क या विशेष उपभोक्ता पंपों से आपूर्ति लेते हैं।

आंकड़ों के मुताबिक लगभग 42 करोड़ लीटर डीजल की मांग इस श्रेणी से खुदरा नेटवर्क की ओर स्थानांतरित हुई। इसके चलते कुछ क्षेत्रों में रिटेल आउटलेट्स पर अतिरिक्त दबाव देखा गया और आपूर्ति प्रबंधन को लेकर चुनौतियां सामने आईं।

200 लीटर सीमा अस्थायी व्यवस्था

सरकार ने स्थिति को संतुलित बनाए रखने के लिए 11 जून को एक अस्थायी आदेश जारी किया था। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को खुदरा पंप से प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर डीजल खरीदने की अनुमति दी गई है। यह व्यवस्था लगभग 90 दिनों के लिए लागू की गई है।

मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम ईंधन की कमी के कारण नहीं, बल्कि वितरण प्रणाली को व्यवस्थित रखने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है तथा उपभोक्ताओं को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.