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FoodSafety – दूध में मिलावट की बढ़ती चिंता, जानिए असली और नकली की पहचान

FoodSafety – बाजार में खाद्य पदार्थों में मिलावट के लगातार सामने आ रहे मामलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फल, सब्जियां और अन्य खाद्य उत्पादों के बाद अब दूध की शुद्धता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हाल के दिनों में विभिन्न राज्यों में बड़ी मात्रा में नकली दूध पकड़े जाने की घटनाओं ने उपभोक्ताओं को सतर्क कर दिया है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि रोजाना इस्तेमाल होने वाला दूध वास्तव में शुद्ध है या उसमें किसी प्रकार की मिलावट की गई है।

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दूध में मिलावट क्यों बन रही है गंभीर समस्या

दूध दैनिक आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए। लेकिन अधिक लाभ कमाने की होड़ में कुछ लोग इसकी गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए उसमें पानी मिलाया जाता है। वहीं उसकी गाढ़ी बनावट बनाए रखने के लिए स्टार्च जैसी चीजों का इस्तेमाल भी किया जाता है। कुछ मामलों में डिटर्जेंट और यूरिया जैसे हानिकारक तत्वों की मिलावट की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।

पानी की मिलावट का आसान घरेलू परीक्षण

दूध में पानी मिलाया गया है या नहीं, इसकी प्राथमिक जांच घर पर भी की जा सकती है। इसके लिए किसी साफ कांच की सतह या लकड़ी के टुकड़े पर दूध की एक बूंद डालें। यदि बूंद धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ती है और पीछे हल्का निशान छोड़ती है, तो दूध अपेक्षाकृत शुद्ध माना जा सकता है। दूसरी ओर यदि बूंद तेजी से बह जाए और कोई निशान न छोड़े, तो उसमें पानी की मिलावट होने की संभावना हो सकती है।

झाग से भी मिल सकती है मिलावट की जानकारी

दूध में डिटर्जेंट जैसी मिलावट की आशंका होने पर एक साधारण परीक्षण किया जा सकता है। इसके लिए थोड़ी मात्रा में दूध और बराबर मात्रा में पानी को कांच के गिलास में डालकर अच्छी तरह हिलाएं। यदि बनने वाला झाग कम हो और कुछ ही समय में समाप्त हो जाए तो यह सामान्य स्थिति मानी जाती है। लेकिन अत्यधिक झाग बनने और लंबे समय तक बने रहने की स्थिति मिलावट की ओर संकेत कर सकती है।

स्टार्च की पहचान करने का तरीका

दूध को गाढ़ा दिखाने के लिए स्टार्च मिलाए जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं। इसकी जांच के लिए थोड़ी मात्रा में दूध लेकर उसमें आयोडीन युक्त घोल की कुछ बूंदें डाली जा सकती हैं। यदि दूध का रंग नीलेपन की ओर बदलने लगे तो यह स्टार्च की मौजूदगी का संकेत माना जाता है। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञ जांच को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

यूरिया की मिलावट से स्वास्थ्य पर पड़ सकता है असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यूरिया युक्त दूध का लगातार सेवन शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। इसकी पहचान के लिए प्रयोगशाला परीक्षण सबसे विश्वसनीय तरीका माना जाता है। घरेलू स्तर पर कुछ पारंपरिक परीक्षण किए जाते हैं, लेकिन सटीक परिणाम के लिए अधिकृत जांच केंद्रों की मदद लेना बेहतर विकल्प है।

जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दूध हमेशा भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदना चाहिए। यदि स्वाद, रंग, गंध या बनावट में कोई असामान्यता महसूस हो तो उसका उपयोग करने से बचना चाहिए। साथ ही संदिग्ध उत्पादों की जानकारी संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग को देना भी उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी है। बढ़ती मिलावट के दौर में जागरूकता और सतर्कता ही सुरक्षित खानपान की सबसे मजबूत कड़ी साबित हो सकती है।

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