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AbhishekBanerjee – मानहानि मामले में सांसद अभिषेक बनर्जी की बढ़ीं कानूनी चुनौतियां

AbhishekBanerjee – तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर चर्चा में हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ ने एक पुराने मानहानि मामले में उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटा दी है। अदालत के इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुल गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अभिषेक बनर्जी विभिन्न जांचों और कानूनी मामलों को लेकर पहले से ही सुर्खियों में हैं।

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हाई कोर्ट ने हटाई वारंट पर लगी रोक

जानकारी के अनुसार, न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने अभिषेक बनर्जी की याचिका को खारिज करते हुए पहले से दी गई अंतरिम राहत समाप्त कर दी। इससे पहले नवंबर 2025 में उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाई गई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई गई और न ही प्रभावी रूप से पक्ष रखा गया।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आदेश की प्रति तत्काल संबंधित ट्रायल कोर्ट को भेजी जाए ताकि आगे की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ सके।

पुराने मानहानि मामले से जुड़ा विवाद

यह मामला लगभग छह वर्ष पुराना बताया जा रहा है। आरोप है कि एक चुनावी सभा के दौरान अभिषेक बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेता आकाश विजयवर्गीय के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसी बयान को आधार बनाते हुए मानहानि का मामला दायर किया गया था।

शिकायत के बाद भोपाल स्थित विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई थी। बाद में अदालत ने मामले में गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जिसके खिलाफ राहत पाने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया था।

आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर

हाई कोर्ट से राहत समाप्त होने के बाद अब संबंधित एजेंसियां और स्थानीय पुलिस आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस स्थिति में अभिषेक बनर्जी के पास उच्चतम न्यायालय का रुख करने का विकल्प उपलब्ध है। यदि वे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हैं तो वहां से मिलने वाले आदेश आगे की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

फिलहाल इस मामले में गिरफ्तारी को लेकर कोई आधिकारिक कार्रवाई सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की गई है, लेकिन अदालत के ताजा आदेश ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा तेज कर दी है।

राजनीतिक माहौल के बीच बढ़ी चर्चा

अदालती फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इस मामले को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विपक्षी दल इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष अदालतों में आगे क्या कदम उठाते हैं।

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