उत्तराखण्ड

HealthAdministration – उत्तराखंड में सीएमओ पदों पर तैनाती को लेकर नई चुनौती

HealthAdministration – उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग को वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों के मामले में नई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में विभिन्न जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के पदों पर की गई तैनातियों के बावजूद कई अधिकारियों ने नई जिम्मेदारी संभालने में असमर्थता जताई है। इससे स्वास्थ्य प्रशासन की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं और विभाग को वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करना पड़ रहा है।

uttarakhand cmo posting new challenge

राज्य सरकार ने हाल ही में कई जिलों में नए सीएमओ नियुक्त करने का निर्णय लिया था। इसके लिए शासन स्तर से आदेश भी जारी किए गए थे। हालांकि कुछ अधिकारियों की आपत्तियों और व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण प्रारंभिक सूची में संशोधन करना पड़ा। इसके बावजूद अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ सके हैं।

तीन जिलों में नियुक्त अधिकारी नहीं पहुंचे कार्यभार संभालने

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिन अधिकारियों को अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों में मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उनमें से किसी ने भी अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। संबंधित अधिकारियों ने विभाग को अपनी परिस्थितियों से अवगत कराते हुए नई तैनाती पर तत्काल योगदान देने में असमर्थता व्यक्त की है।

सूत्रों के अनुसार कुछ अधिकारियों ने व्यक्तिगत और प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है। वहीं कुछ मामलों में वर्तमान दायित्वों और नई नियुक्ति के बीच समन्वय की चुनौती भी सामने आई है।

अन्य जिलों में निर्धारित समय के बाद होगा पदभार ग्रहण

टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी जिलों के लिए नियुक्त अधिकारियों ने भी अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है। हालांकि इन जिलों के लिए अलग-अलग समयसीमा तय की गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारी नई जिम्मेदारियां संभालेंगे।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तहत कुछ स्थानांतरण और पदभार ग्रहण करने में समय लगना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है।

स्वास्थ्य मंत्री की सख्ती के बाद शुरू हुई कार्रवाई

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने हाल के दिनों में विभागीय व्यवस्थाओं की समीक्षा की है। इसी क्रम में उन डॉक्टरों और कर्मचारियों की पहचान की गई जो लंबे समय से अपने मूल कार्यस्थल के बजाय अन्य संस्थानों में सेवाएं दे रहे थे।

मंत्री के निर्देश के बाद ऐसे कर्मचारियों को उनके मूल अस्पतालों में वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विभाग का कहना है कि इससे विभिन्न अस्पतालों में उपलब्ध मानव संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

देहरादून में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की वापसी

देहरादून जिले के सरकारी अस्पतालों से कई डॉक्टरों और कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापन वाले संस्थानों में लौटाने के आदेश जारी किए गए हैं। इसमें चिकित्सा, नर्सिंग, फार्मेसी और प्रशासनिक संवर्ग के कर्मचारी शामिल हैं।

अधिकारियों के अनुसार इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन अस्पतालों को पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराना है जहां वर्तमान में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी महसूस की जा रही है। इससे मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलने की उम्मीद है।

कोरोनेशन और दून अस्पताल से भी हुए स्थानांतरण

राजधानी के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शामिल कोरोनेशन अस्पताल और दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल से भी कुछ विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग अधिकारियों को उनके मूल कार्यस्थलों के लिए कार्यमुक्त किया गया है।

इनमें सर्जरी, बाल रोग, फिजिशियन, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और ईएनटी जैसे विभागों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आगामी समय में कर्मचारियों के पुनर्वितरण से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार आएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं को संतुलित करने पर जोर

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि राज्य के सभी जिलों और अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक फेरबदल और तैनाती प्रक्रियाओं को लागू किया जा रहा है।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नई नियुक्तियों और स्टाफ पुनर्व्यवस्था का राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर कितना प्रभाव पड़ता है और विभाग लंबित पदों पर नियुक्ति की चुनौती से किस तरह निपटता है।

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.