बिहार

EncounterCase – भरत तिवारी मुठभेड़ पर तेज हुई राजनीति, तेज हुई जांच की मांग

EncounterCase – भोजपुर जिले के शाहपुर क्षेत्र में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ के दौरान हुई मौत को लेकर राजनीतिक बहस लगातार गहराती जा रही है। इस मामले में अब विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता भी सवाल उठाने लगे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने घटना को गंभीर बताते हुए इसकी निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि जनता के बीच किसी तरह की शंका न रहे।

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अश्विनी चौबे ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

शुक्रवार को जारी अपने बयान में अश्विनी चौबे ने भोजपुर में हुई इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई होना आवश्यक है। उनके अनुसार, यदि घटना से जुड़े तथ्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। चौबे ने राज्य सरकार से मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द कदम उठाने की अपील की।

केंद्रीय गृह मंत्री से हस्तक्षेप की अपील

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मामले पर ध्यान देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने राज्य नेतृत्व से भी आग्रह किया कि मामले की जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी कराई जाए, जिससे लोगों का विश्वास बना रहे।

शिक्षा मंत्री ने भी जताई थी चिंता

इस प्रकरण पर बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले सभी पहलुओं की पूरी जानकारी होना जरूरी है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने संकेत दिया था कि इस तरह की घटनाओं की समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी पिछले कुछ समय से प्रशासन की निगरानी में था। उस पर अवैध हथियार रखने और एक प्रशासनिक अधिकारी को धमकी देने के आरोप लगाए गए थे। सोशल मीडिया पर भी उसके कई वीडियो सामने आए थे, जिनकी चर्चा स्थानीय स्तर पर हो रही थी।

बताया गया कि जब पुलिस उसे पकड़ने पहुंची तो कथित तौर पर उसने विरोध किया और हथियार दिखाया। इसके बाद सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई शुरू की। अगले दिन हुई मुठभेड़ में वह घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

परिवार ने मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच की मांग की

भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि युवक ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसके खिलाफ गोलीबारी की गई। परिवार का कहना है कि घटना की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके।

घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है। वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है। इस बीच भोजपुर पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रारंभिक कार्रवाई की है। जिला पुलिस प्रशासन की ओर से शाहपुर थाने के प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है और आगे की जांच जारी है।

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