OFS – हिस्सेदारी बिक्री की घोषणा के बाद दबाव में आया IRFC शेयर
OFS – सरकार द्वारा हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) के शेयरों में बुधवार को कमजोरी देखने को मिली। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर 5 प्रतिशत से अधिक गिरकर 93.59 रुपये तक पहुंच गया। इससे पहले मंगलवार को यह 98.67 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि नए कारोबारी सत्र में इसकी शुरुआत 94 रुपये के स्तर पर हुई।

सरकार 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है
केंद्र सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से IRFC में अपनी 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। यह हिस्सेदारी लगभग 13.06 करोड़ शेयरों के बराबर है। इसके साथ ही सरकार ने 1 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने के लिए ग्रीनशू विकल्प भी रखा है। यदि निवेशकों की ओर से अच्छी मांग मिलती है, तो कुल 2 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बाजार में उतारी जा सकती है।
फ्लोर प्राइस बाजार भाव से कम तय
कंपनी की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार OFS के लिए फ्लोर प्राइस 91 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है। यह कीमत शेयर के पिछले बंद भाव की तुलना में करीब 7.5 प्रतिशत कम है। संस्थागत और गैर-खुदरा निवेशकों के लिए यह पेशकश बुधवार को खुली, जबकि खुदरा निवेशकों को इसमें भाग लेने का अवसर गुरुवार को मिलेगा।
हिस्सेदारी संरचना में हो सकता है बदलाव
मार्च 2026 तिमाही के अंत तक IRFC में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 84.65 प्रतिशत थी। वहीं, खुदरा निवेशकों के पास 9.68 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की गई थी। हिस्सेदारी बिक्री पूरी होने के बाद कंपनी के शेयरों का फ्री-फ्लोट बढ़ सकता है, जिससे बाजार में शेयरों की उपलब्धता और कारोबार की तरलता बेहतर होने की संभावना है।
विशेषज्ञों ने बताया निवेशकों के लिए क्या मायने
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह OFS केवल रियायती कीमत पर शेयर खरीदने का अवसर नहीं है, बल्कि रेलवे क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनियों को लेकर निवेशकों के भरोसे की भी परीक्षा है। उनका कहना है कि IRFC भारतीय रेलवे की पूंजीगत परियोजनाओं के वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसका कारोबार सरकारी समर्थन से जुड़ा होने के कारण जोखिम अपेक्षाकृत सीमित माना जाता है।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी संकेत देते हैं कि रेलवे क्षेत्र के शेयरों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेज बढ़त देखने को मिली है। ऐसे में मौजूदा मूल्यांकन पहले की तुलना में उतना आकर्षक नहीं माना जा रहा, इसलिए निवेशकों को निर्णय लेते समय सतर्कता बरतनी चाहिए।
खुदरा निवेशकों के लिए क्या है संकेत
बाजार विश्लेषकों के अनुसार 91 रुपये का फ्लोर प्राइस मौजूदा बाजार स्तर की तुलना में आकर्षक दिखाई देता है। फिर भी खुदरा निवेशकों को OFS में भागीदारी से पहले संस्थागत निवेशकों की प्रतिक्रिया और अंतिम कट-ऑफ मूल्य पर नजर रखनी चाहिए। इससे निवेश निर्णय लेने में बेहतर स्पष्टता मिल सकती है।
विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है कदम
IRFC भारतीय रेलवे की प्रमुख वित्तीय इकाइयों में शामिल है और रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाती है। सरकार की यह हिस्सेदारी बिक्री उसके व्यापक विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा मानी जा रही है। इससे पहले वर्ष के दौरान कोल इंडिया, एनएचपीसी, एनएलसी इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और जीआईसी जैसी सरकारी कंपनियों में भी OFS के माध्यम से हिस्सेदारी बिक्री की जा चुकी है।