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BRICSSecurity – राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों ने आतंकवाद पर साझा रणनीति पर दिया जोर

BRICSSecurity – नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की बैठक में आतंकवाद और उभरते सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सामूहिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। बैठक में शामिल सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों के खिलाफ एकजुट रुख अपनाने की आवश्यकता दोहराई और इस बात पर चिंता जताई कि आतंकी संगठन नई तकनीकों का उपयोग कर अपनी गतिविधियों को विस्तार देने का प्रयास कर रहे हैं।

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नई तकनीकों से बढ़ती चुनौतियों पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान सुरक्षा विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। विशेष रूप से उन तकनीकी माध्यमों पर चर्चा की गई जिनका उपयोग आतंकवादी समूह संचार, प्रचार और समन्वय के लिए कर रहे हैं।

प्रतिनिधियों ने माना कि डिजिटल माध्यमों और आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। ऐसे में सदस्य देशों के बीच बेहतर समन्वय और समय पर सूचना साझा करना पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

संयुक्त कार्य समूहों की गतिविधियों की समीक्षा

बैठक में आतंकवाद से संबंधित ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूह की हालिया गतिविधियों की समीक्षा भी की गई। इसके अलावा सूचना एवं संचार तकनीक से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर काम कर रहे समूहों की प्रगति का भी आकलन किया गया।

सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने इन कार्य समूहों के प्रयासों को उपयोगी बताते हुए भविष्य में सहयोग को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। चर्चा के दौरान यह भी सामने आया कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर संवाद और संयुक्त पहल आवश्यक हैं।

कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बढ़ेगा सहयोग

बैठक में भाग लेने वाले अधिकारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद और साइबर अपराध जैसे खतरों का मुकाबला केवल साझा प्रयासों से ही प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। इसके लिए सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग और सूचनाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

सुरक्षा सलाहकारों ने क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ाने का समर्थन किया। उनका मानना है कि मजबूत संस्थागत सहयोग से उभरते खतरों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सकेगा।

ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा भी रही चर्चा का हिस्सा

बैठक केवल आतंकवाद और साइबर सुरक्षा तक सीमित नहीं रही। प्रतिनिधियों ने ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी चुनौतियों पर भी विचार साझा किए।

हाल के वर्षों में विभिन्न अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के कारण आपूर्ति प्रणालियों पर पड़े प्रभाव का उल्लेख करते हुए सदस्य देशों ने स्थिर और सुरक्षित आपूर्ति नेटवर्क के महत्व को रेखांकित किया। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों और उससे पैदा होने वाली अस्थिरता पर भी चर्चा हुई।

भारत की भूमिका को मिला समर्थन

बैठक में शामिल देशों के प्रतिनिधियों ने ब्रिक्स मंच पर भारत की भूमिका और नेतृत्व के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने संगठन के भीतर सहयोग बढ़ाने और साझा हितों के मुद्दों पर आगे भी मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

इस दौरान ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी सहित रूस, ईरान और अन्य सदस्य देशों के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी एवं प्रतिनिधि मौजूद रहे।

वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर साझा सहमति

बैठक का मुख्य संदेश यही रहा कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। सदस्य देशों ने आतंकवाद, साइबर खतरों और अन्य सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ संयुक्त प्रयास जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सहयोग, संवाद और विश्वास को मजबूत करना आवश्यक होगा।

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