Healthcare – झारखंड में रिम्स-2 परियोजना को मंजूरी, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा बड़ा विस्तार…
Healthcare – झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रिपरिषद की बैठक में रिम्स-2 परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अब इस महत्वाकांक्षी योजना का काम जल्द जमीन पर दिखाई देगा। सरकार का उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना और राज्य के लोगों को बेहतर इलाज उनके अपने प्रदेश में ही सुनिश्चित करना है। इस परियोजना पर 4,189 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी और इसका निर्माण रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की रिंग रोड के पास उपलब्ध लगभग 150.92 एकड़ भूमि पर दो चरणों में किया जाएगा।

पहले चरण में विकसित होगा आधुनिक मेडिकल परिसर
सरकार के अनुसार परियोजना के पहले चरण में अत्याधुनिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, फैकल्टी और कर्मचारियों के आवास, खेल परिसर तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। लक्ष्य है कि यह चरण करीब ढाई वर्ष में पूरा कर लिया जाए। प्रस्ताव के मुताबिक एमबीबीएस, पीजी और पोस्ट पीजी स्तर पर 200-200 सीटों की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी, जिससे चिकित्सा शिक्षा के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
मौजूदा स्वास्थ्य ढांचे पर बढ़ रहा दबाव
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि राज्य की वर्तमान चिकित्सा सुविधाएं बढ़ती आबादी की जरूरतों के अनुरूप नहीं हैं। लगभग 3.92 करोड़ की आबादी वाले झारखंड में फिलहाल केवल 10 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जिनमें सात सरकारी और तीन निजी संस्थान शामिल हैं। चिकित्सकों की उपलब्धता भी राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। विभाग के अनुसार अस्पतालों में प्रति हजार आबादी पर उपलब्ध बेड की संख्या भी राष्ट्रीय मानक से नीचे है, जबकि विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों की कमी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है।
रिम्स पर मरीजों का बढ़ता बोझ
वर्ष 1960 में स्थापित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान वर्तमान में लगभग 1500 बेड के साथ संचालित हो रहा है, लेकिन यहां क्षमता से कहीं अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। प्रतिदिन तीन हजार से अधिक लोग ओपीडी सेवाओं का लाभ लेते हैं। ट्रॉमा, न्यूरोसर्जरी, कैंसर और मातृ स्वास्थ्य जैसे विभागों में लगातार बढ़ती भीड़ के कारण आधुनिक सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सरकार का मानना है कि रिम्स-2 बनने से इस दबाव में उल्लेखनीय कमी आएगी।
बाहर इलाज कराने की मजबूरी होगी कम
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हर वर्ष करीब 1.2 लाख मरीज गंभीर और विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे राज्यों के अस्पतालों का रुख करते हैं। नई परियोजना के शुरू होने से राज्य में ही उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे मरीजों का आर्थिक बोझ भी कम होगा। सरकार का लक्ष्य झारखंड को पूर्वी भारत के प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा और मेडिकल शिक्षा केंद्र के रूप में विकसित करना है। साथ ही इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद जताई गई है।