GoldPrice – कमजोर अमेरिकी आंकड़ों से सोने में तेजी, चांदी भी हुई मजबूत
GoldPrice – अमेरिका से आए कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में लगातार दूसरे दिन मजबूती देखने को मिली। इन आंकड़ों के बाद निवेशकों का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इस वर्ष ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर पहले जितना आक्रामक रुख नहीं अपनाएगा। इसी उम्मीद ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड लगभग 4,150 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसमें तीन सप्ताह की सबसे बड़ी दैनिक बढ़त दर्ज की गई थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में रही तेजी
सिंगापुर बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,151 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। वहीं चांदी में भी तेजी बनी रही और इसका भाव लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 61.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। लगातार कई सत्रों से चांदी में मजबूती देखने को मिल रही है। दूसरी ओर, ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स में पिछले सत्र की गिरावट के बाद हल्की रिकवरी दर्ज की गई।
घरेलू बाजार में मिला मिला-जुला रुख
अंतरराष्ट्रीय तेजी के बावजूद भारतीय वायदा बाजार में गुरुवार देर रात कारोबार के दौरान सोने और चांदी में सीमित उतार-चढ़ाव देखा गया। MCX पर सोना मामूली कमजोरी के साथ लगभग 1,45,723 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ, जबकि चांदी का भाव करीब 2,33,200 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। वहीं सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोने का औसत भाव लगभग 1,43,003 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब 2,28,850 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई।
रोजगार आंकड़ों का बाजार पर असर
अमेरिका में जून महीने के रोजगार संबंधी आंकड़ों ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। आंकड़ों से संकेत मिला कि नई नौकरियों की रफ्तार अपेक्षा से कमजोर रही है। इससे यह संभावना मजबूत हुई कि आर्थिक गतिविधियों की गति धीमी पड़ सकती है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाकर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमतों को समर्थन मिलता है।
ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदें
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना काफी घट गई है। स्वैप बाजार के अनुमान भी इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि पहले की तुलना में अब दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम रह गई है। ब्याज दरों पर नरम रुख आमतौर पर सोने के लिए सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इस धातु पर ब्याज नहीं मिलता और कम दरों के माहौल में इसकी मांग बढ़ जाती है।
आगे क्या रह सकता है रुख
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी और महंगाई के दबाव में संभावित कमी भी कीमती धातुओं के लिए अनुकूल संकेत हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, हाल की तेजी के पीछे शॉर्ट पोजीशन की कटाई और नए निवेशकों की खरीदारी भी प्रमुख वजह रही है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में सोने की कीमतें सीमित दायरे में बढ़ सकती हैं और आगे की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों तथा फेडरल रिजर्व की नीतियों पर निर्भर करेगी।