अंतर्राष्ट्रीय

Pakistan – पूर्व सिंगापुर राजनयिक ने पाकिस्तान की चुनौतियों पर रखी बेबाक राय

Pakistan – सिंगापुर के पूर्व विदेश सचिव और वरिष्ठ राजनयिक बिलहारी कौसिकन ने एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान की मौजूदा परिस्थितियों पर खुलकर अपनी राय रखी। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से राजनीतिक, आर्थिक और संस्थागत चुनौतियों का सामना कर रहा है। उनके अनुसार, यदि देश के पास परमाणु हथियार नहीं होते, तो वैश्विक स्तर पर उसके प्रति चिंता का स्वरूप काफी अलग होता।

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कूटनीति से आगे की चुनौतियों पर जोर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान ने खुद को क्षेत्रीय संवाद और मध्यस्थता के संभावित पक्ष के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की है। इस पर टिप्पणी करते हुए कौसिकन ने कहा कि किसी भी कूटनीतिक पहल का महत्व तभी है, जब उसका लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि केवल विदेश नीति में सक्रियता दिखाने से आर्थिक कठिनाइयों और लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान नहीं होता।

आर्थिक स्थिति और आंतरिक नीतियों पर टिप्पणी

पूर्व राजदूत का कहना था कि पाकिस्तान की प्रमुख चुनौतियां उसकी आंतरिक व्यवस्था से जुड़ी हैं। उन्होंने आर्थिक कुप्रबंधन और लंबे समय से चली आ रही नीतिगत कमजोरियों को देश की स्थिति के लिए जिम्मेदार बताया। साथ ही, उन्होंने चरमपंथी संगठनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि स्थायी सुधार के लिए संस्थागत बदलाव जरूरी हैं।

परमाणु क्षमता को बताया वैश्विक चिंता का कारण

सम्मेलन के दौरान कौसिकन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पाकिस्तान में रुचि का एक बड़ा कारण उसकी परमाणु क्षमता है। उनके अनुसार, वैश्विक शक्तियां इस बात को लेकर सतर्क रहती हैं कि क्षेत्रीय अस्थिरता का असर परमाणु सुरक्षा पर न पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि यही पहलू पाकिस्तान को वैश्विक रणनीतिक चर्चाओं में महत्वपूर्ण बनाए रखता है।

भूगोल नहीं, नीतियां अधिक जिम्मेदार

एक पाकिस्तानी पत्रकार ने देश की समस्याओं के पीछे उसके भौगोलिक स्थान का तर्क रखा। इस पर कौसिकन ने असहमति जताते हुए कहा कि केवल पड़ोसी देशों या भौगोलिक परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी देश की प्रगति उसके प्रशासन, नीति निर्माण और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन पर अधिक निर्भर करती है।

राजनीतिक व्यवस्था और सैन्य भूमिका पर सवाल

पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि देश में निर्वाचित नेतृत्व और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच शक्ति संतुलन लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। उनके अनुसार, यह स्थिति लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने की दिशा में चुनौती पेश करती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों के बिना दीर्घकालिक स्थिरता हासिल करना कठिन होगा।

पुराने अनुभव का भी किया उल्लेख

अपने संबोधन के दौरान बिलहारी कौसिकन ने वर्ष 1991 में सिंगापुर एयरलाइंस विमान अपहरण की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने इस उदाहरण के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा, शासन व्यवस्था और निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि किसी भी देश के लिए मजबूत संस्थाएं, जवाबदेह शासन और प्रभावी नीतियां ही दीर्घकालिक स्थिरता का आधार बनती हैं।

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