IVF – नई तकनीक से जुड़वा गर्भधारण का जोखिम घटाने में मिली महत्वपूर्ण सफलता
IVF- सहायक प्रजनन तकनीक (आईवीएफ) से जुड़ी नई रिसर्च ने गर्भधारण की प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण पहलू सामने रखा है। अध्ययन में बताया गया है कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से आईवीएफ के बाद जुड़वा या तीन बच्चों के एक साथ जन्म लेने की संभावना पहले की तुलना में कम की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे गर्भावस्था को अधिक सुरक्षित बनाने और मां व शिशु दोनों के स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को घटाने में मदद मिल सकती है।

बदलती तकनीक ने बदला आईवीएफ का तरीका
कुछ वर्ष पहले तक आईवीएफ उपचार में सफलता दर सीमित मानी जाती थी। ऐसे में गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के उद्देश्य से चिकित्सक कई मामलों में एक साथ दो या उससे अधिक भ्रूण गर्भाशय में स्थानांतरित करते थे। इस प्रक्रिया से जुड़वा या एक से अधिक बच्चों के जन्म की संभावना भी बढ़ जाती थी। नई तकनीकों और वैज्ञानिक प्रगति के बाद अब बेहतर गुणवत्ता वाले भ्रूण का चयन संभव हो गया है, जिससे एक ही भ्रूण प्रत्यारोपित करके भी सफल गर्भधारण की संभावना बढ़ी है।
ब्लास्टोसिस्ट और विट्रिफिकेशन तकनीक की भूमिका
रिसर्च में ब्लास्टोसिस्ट कल्चर और विट्रिफिकेशन जैसी आधुनिक प्रक्रियाओं को महत्वपूर्ण बताया गया है। इन तकनीकों के माध्यम से भ्रूण को बेहतर तरीके से विकसित और सुरक्षित रखा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब स्वस्थ और उपयुक्त भ्रूण का चयन किया जाता है, तब एक ही भ्रूण को स्थानांतरित करने की रणनीति अधिक प्रभावी साबित हो सकती है। इससे एकल गर्भधारण की संभावना बढ़ती है और बहु-भ्रूण गर्भावस्था से जुड़े संभावित जोखिम कम हो सकते हैं।
विशेषज्ञ ने क्या बताया
गाजियाबाद स्थित यशोदा मेडिसिटी हॉस्पिटल के आईवीएफ एवं इनफर्टिलिटी विभाग की कंसल्टेंट डॉ. स्नेहा मिश्रा के अनुसार, आधुनिक आईवीएफ तकनीकों ने उपचार की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने बताया कि अब भ्रूण चयन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सटीक हो चुकी है। इसी कारण कई मामलों में एक ही स्वस्थ भ्रूण को स्थानांतरित करने से भी अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक मरीज की स्थिति अलग होती है, इसलिए उपचार की योजना व्यक्तिगत चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर तय की जाती है।
सुरक्षित मातृत्व पर बढ़ा जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि एकल गर्भावस्था कई परिस्थितियों में मां और शिशु दोनों के लिए अधिक सुरक्षित मानी जाती है। जुड़वा या तीन बच्चों वाली गर्भावस्था में समय से पहले प्रसव, कम जन्म वजन और अन्य चिकित्सकीय जटिलताओं का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। नई तकनीकों का उद्देश्य केवल गर्भधारण की सफलता बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरी गर्भावस्था को अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाना भी है। चिकित्सकों का कहना है कि आईवीएफ कराने वाले दंपतियों को उपचार शुरू करने से पहले उपलब्ध तकनीकों, संभावित लाभ और जोखिमों की विस्तृत जानकारी अपने विशेषज्ञ से अवश्य लेनी चाहिए, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप उचित निर्णय लिया जा सके।