RoadClosure – भारी बारिश से उत्तराखंड में 120 सड़कें बंद, कई जिलों में आज भी अलर्ट
RoadClosure – उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश का असर जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में भूस्खलन और जलभराव के कारण 120 सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने सोमवार को देहरादून सहित छह जिलों में भारी बारिश की संभावना जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल में कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तीव्र वर्षा और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है। मैदानी इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। रविवार को देहरादून का अधिकतम तापमान 33.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 24 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि पंतनगर में अधिकतम तापमान 34.7 डिग्री सेल्सियस रहा।
सड़क संपर्क बहाल करने में जुटा प्रशासन
लोक निर्माण विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक 20 सड़कें पौड़ी जिले में बंद हैं। इसके अलावा चमोली में 17, उत्तरकाशी में करीब 15 और पिथौरागढ़ में 14 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कई स्थानों पर भारी भूस्खलन के कारण मलबा हटाने में समय लग रहा है। सभी संबंधित इकाइयों को सड़क संपर्क जल्द बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुल बहने से लोगों को लंबा रास्ता अपनाना पड़ा
देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर बना अस्थायी पुल तेज बहाव में बह गया। इसके चलते रविवार सुबह तक यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा और लोगों को लगभग 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी। बाद में लोक निर्माण विभाग ने वैकल्पिक पुल पर यातायात शुरू कराया, जिसके बाद करीब 11 घंटे बाद आवागमन सामान्य हो सका। वहीं जौनसार क्षेत्र में लगातार बारिश के चलते 13 मोटर मार्ग भी बंद हो गए।
लखवाड़ परियोजना के निर्माण स्थल पर हुआ नुकसान
बारिश के बीच लखवाड़ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना का निर्माणाधीन हिस्सा ढहकर दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गिरा। हादसे में निर्माण कार्य में लगी मशीनें और कुछ वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। राहत की बात यह रही कि घटना के समय श्रमिक दूसरे हिस्से में काम कर रहे थे, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। बाद में मलबा हटाकर राजमार्ग पर यातायात दोबारा शुरू कराया गया।
नदी किनारे बसे इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी
यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद यूजेवीएनएल ने व्यासी से कुल्हाल तक स्थापित अर्ली वॉर्निंग सिस्टम सक्रिय कर दिया है। रविवार को यमुना का जलस्तर खतरे के निशान के बराबर दर्ज किया गया, जबकि टौंस नदी भी चेतावनी स्तर के करीब बह रही है। जिला प्रशासन ने कालसी और विकासनगर क्षेत्र के नदी किनारे बसे गांवों में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
निर्माण कार्यों पर उठे सवाल
लगातार बारिश के बीच निर्माणाधीन परियोजनाओं को हुए नुकसान ने सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए हैं। यूजेवीएनएल के जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि बरसात के दौरान निर्माण स्थलों पर इस तरह की चुनौतियां सामने आना असामान्य नहीं है। फिलहाल क्षतिग्रस्त हिस्सों का आकलन किया जा रहा है और आवश्यक मरम्मत कार्य की तैयारी शुरू कर दी गई है।