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CrudeOil – पश्चिम एशिया तनाव से कच्चे तेल में उछाल, ईंधन महंगा होने की आशंका

CrudeOil- पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हुए तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।

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ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों में दर्ज हुई तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर करीब 79.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी लगभग 74.20 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। दोनों प्रमुख बेंचमार्क में एक ही दिन में 4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। इससे पहले भी पिछले सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली थी, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण

विश्लेषकों के अनुसार मौजूदा तेजी की बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बढ़ने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा हुई है। यदि इस मार्ग से तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

150 डॉलर तक पहुंचने की आशंका पर विशेषज्ञों की नजर

कुछ बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि आपूर्ति में गंभीर बाधा आती है तो कच्चे तेल की कीमत 110 से 150 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती है। वहीं अन्य विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास का स्तर बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप दिखाई देता है। हालांकि भविष्य की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और वैश्विक आपूर्ति पर निर्भर करेगी।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी जताई चिंता

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने हालिया रिपोर्ट में संकेत दिया है कि वैश्विक तेल बाजार अभी भी संतुलन बनाने की प्रक्रिया में है। एजेंसी के अनुसार उत्पादन में सुधार के बावजूद कई क्षेत्रों में आपूर्ति पहले के स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में यदि मौजूदा तनाव और बढ़ता है तो ऊर्जा बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

भारत में ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है असर

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों का असर घरेलू ईंधन लागत पर पड़ सकता है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें कई अन्य कारकों जैसे विनिमय दर, कर संरचना और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर भी निर्भर करती हैं। इसलिए वैश्विक बाजार में तेजी का सीधा और तत्काल प्रभाव हर बार उपभोक्ता कीमतों पर दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।

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