Sleep – देर तक सोने वालों को ताने देना सेहत पर पड़ सकता है भारी
Sleep – भारतीय परिवारों में सुबह जल्दी उठने की आदत को अक्सर अनुशासन और अच्छी दिनचर्या से जोड़ा जाता है। इसके विपरीत, जो लोग देर तक सोते हैं उन्हें कई बार आलसी या लापरवाह समझ लिया जाता है। कई घरों में किसी को जगाने के लिए पंखा बंद करना, कमरे की लाइट जला देना या तेज आवाज करना आम बात मानी जाती है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किसी की नींद को लेकर ताने देना या उसे शर्मिंदा करना सही नहीं है। पर्याप्त नींद शरीर और दिमाग, दोनों के लिए जरूरी होती है।

क्या है Sleep Shaming?
मुंबई के ऑर्थोपेडिक सर्जन, हेल्थ एजुकेटर और न्यूट्रीबाइट वेलनेस के सह-संस्थापक डॉ. मनन वोरा ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में बताया कि किसी व्यक्ति को उसकी नींद या देर से उठने की आदत के लिए अपमानित करना “Sleep Shaming” कहलाता है। उनके अनुसार, हर व्यक्ति की दिनचर्या एक जैसी नहीं होती। यदि कोई देर रात तक काम, पढ़ाई या अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्त रहा है, तो सुबह देर से उठना उसकी शारीरिक आवश्यकता भी हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उठने का समय देखकर किसी व्यक्ति के स्वभाव या मेहनत का आकलन करना उचित नहीं है। शरीर को जितनी नींद चाहिए, उतनी पूरी होना अधिक महत्वपूर्ण है।
पर्याप्त नींद क्यों है जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नींद केवल आराम करने का समय नहीं होती, बल्कि इसी दौरान शरीर और मस्तिष्क खुद को पुनर्स्थापित करते हैं। आम तौर पर वयस्कों के लिए प्रतिदिन लगभग 6 से 8 घंटे की नींद आवश्यक मानी जाती है। हालांकि यह अवधि हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और जीवनशैली के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
यदि किसी की रात की नींद पूरी नहीं हुई है और उसे समय से पहले जगा दिया जाता है, तो पूरे दिन थकान, चिड़चिड़ापन और काम में एकाग्रता की कमी महसूस हो सकती है। इसलिए केवल जल्दी उठना ही स्वस्थ दिनचर्या का पैमाना नहीं माना जा सकता।
हर व्यक्ति की जरूरत हो सकती है अलग
डॉ. मनन वोरा का कहना है कि सभी लोगों के शरीर की जरूरतें समान नहीं होतीं। कुछ लोग छह घंटे की नींद के बाद पूरी तरह तरोताजा महसूस करते हैं, जबकि कुछ को आठ या उससे अधिक घंटे आराम की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे में किसी की नींद की अवधि की तुलना दूसरे से करना उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि परिवारों में ऐसी सोच विकसित होनी चाहिए, जिसमें पर्याप्त नींद को भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा माना जाए। पर्याप्त आराम मिलने से व्यक्ति की कार्यक्षमता और मानसिक संतुलन दोनों बेहतर बने रहते हैं।
पूरी नींद मिलने से मिल सकते हैं कई लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद का असर केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहता। इससे मस्तिष्क बेहतर तरीके से काम करता है, निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और दिनभर एकाग्रता बनी रहती है। साथ ही मूड संतुलित रहता है और शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया को भी पर्याप्त समय मिलता है।
इसके अलावा अच्छी नींद प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने, मानसिक तनाव कम करने और शरीर को अधिक सक्रिय रखने में भी सहायक मानी जाती है। इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि व्यक्ति की दिनचर्या और जरूरत के अनुसार उसे पर्याप्त नींद लेने का अवसर दिया जाना चाहिए, बजाय इसके कि देर तक सोने के लिए उसे आलोचना का सामना करना पड़े।