ExamLeaks – पेपर लीक मामलों पर व्यापक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई सीमित दखल की बात
ExamLeaks– प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल विस्तृत सुनवाई करने से परहेज किया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका का दायरा काफी व्यापक है और इस स्वरूप में उस पर विचार करना फिलहाल उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि इस विषय से जुड़े कुछ मामलों पर पहले से सुनवाई जारी है।

सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी
मामले की सुनवाई जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने की। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत से आग्रह किया कि लगातार हो रहे पेपर लीक के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को नुकसान पहुंचा है और इस पर न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है। इस पर पीठ ने पूछा कि ऐसे व्यापक मुद्दे में अदालत की भूमिका कितनी हो सकती है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि NEET-UG से जुड़े कथित पेपर लीक मामले की सुनवाई पहले से अलग प्रक्रिया के तहत जारी है।
अगले महीने तक टली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने नई जनहित याचिका पर तत्काल कोई आदेश पारित नहीं किया और मामले की सुनवाई अगले महीने तक के लिए स्थगित कर दी। अदालत का कहना था कि याचिका में उठाए गए मुद्दे व्यापक प्रकृति के हैं, इसलिए उन पर विस्तार से विचार करने की आवश्यकता होगी।
याचिका में छात्रों के हितों का मुद्दा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि लगातार हो रहे पेपर लीक की घटनाओं से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। परीक्षा रद्द होने या दोबारा आयोजित किए जाने की स्थिति में विद्यार्थियों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक स्तर पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अभ्यर्थी वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और कोचिंग, अध्ययन सामग्री, यात्रा तथा अन्य आवश्यक खर्चों पर बड़ी राशि खर्च करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होती है तो इसका असर केवल परिणामों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि छात्रों के आत्मविश्वास और भविष्य की योजनाओं पर भी पड़ता है। याचिका में इसे संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार से भी जोड़ा गया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार
इधर, दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग से जुड़ी याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि मामले को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचीबद्ध किया जाएगा। अदालत ने याचिकाकर्ता को बताया कि इस विषय पर सुनवाई बुधवार को होगी।
पुलिस कार्रवाई को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
याचिकाकर्ता का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आवश्यकता से अधिक बल का प्रयोग किया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसके खिलाफ लगाए गए कुछ दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे। इस पूरे मामले पर अब अदालत में निर्धारित तिथि पर आगे की सुनवाई होगी।