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HomeLoan – घर खरीदने से पहले इन गलतियों से बचेंगे तो घटेगा लोन का खर्च

HomeLoan– अपना घर खरीदना अधिकांश लोगों के जीवन का बड़ा सपना होता है, लेकिन इसके लिए लिया गया होम लोन लंबे समय तक आर्थिक जिम्मेदारी भी बन सकता है। ऐसे में केवल कम EMI देखकर लोन चुनना पर्याप्त नहीं होता। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सही योजना और सोच-समझकर लिया गया फैसला भविष्य में अनावश्यक ब्याज और अतिरिक्त खर्च से बचा सकता है। पहली बार घर खरीदने वाले कई लोग कुछ ऐसी सामान्य गलतियां कर बैठते हैं, जिनका असर वर्षों तक उनकी वित्तीय स्थिति पर पड़ता है।

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लोन की अवधि सोच-समझकर चुनें

कम EMI के लालच में कई लोग बहुत लंबी अवधि का होम लोन चुन लेते हैं। शुरुआत में इससे मासिक किस्त का बोझ कम लगता है, लेकिन लंबी अवधि के कारण कुल ब्याज की राशि काफी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसी अवधि का चयन करें जिसमें मासिक किस्त आपकी आय के अनुसार सहज हो और कुल ब्याज भी अनावश्यक रूप से न बढ़े। लोन की अवधि तय करने से पहले कुल भुगतान का आकलन जरूर करना चाहिए।

डाउन पेमेंट जितना बेहतर, उतना लाभ

यदि खरीदार कम डाउन पेमेंट करता है तो उसे बैंक से अधिक राशि उधार लेनी पड़ती है। इससे मूल लोन राशि बढ़ जाती है और उसी अनुपात में ब्याज का भार भी बढ़ता है। यदि आपकी बचत इसकी अनुमति देती है तो अधिक डाउन पेमेंट करना भविष्य में कुल लोन लागत कम करने का प्रभावी तरीका हो सकता है। इससे बैंक पर निर्भरता भी घटती है और मासिक किस्त अपेक्षाकृत कम रहती है।

केवल EMI नहीं, दूसरे खर्च भी जोड़ें

घर खरीदते समय अधिकांश लोग केवल लोन और EMI पर ध्यान देते हैं, जबकि कई अन्य खर्च भी साथ आते हैं। रजिस्ट्रेशन शुल्क, प्रोसेसिंग फीस, बीमा, स्टांप ड्यूटी, मेंटेनेंस और अन्य शुल्क कुल बजट को प्रभावित कर सकते हैं। यदि इन खर्चों का पहले से अनुमान नहीं लगाया जाए तो बाद में वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। इसलिए घर खरीदने से पहले सभी संभावित खर्चों की सूची तैयार करना समझदारी होगी।

अच्छा Credit Score दिला सकता है बेहतर ब्याज दर

होम लोन की ब्याज दर तय करने में Credit Score महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि आपका स्कोर बेहतर है तो बैंक कम ब्याज दर पर लोन देने पर विचार कर सकते हैं। वहीं कमजोर Credit Score की स्थिति में ब्याज दर बढ़ सकती है, जिससे पूरे लोन की लागत भी अधिक हो जाती है। इसलिए आवेदन करने से पहले अपने क्रेडिट रिकॉर्ड की जांच करना और जरूरत पड़ने पर उसे सुधारना लाभदायक हो सकता है।

जरूरत के अनुसार ही लें लोन

विशेषज्ञों का कहना है कि बैंक जितनी अधिकतम लोन राशि देने को तैयार हो, उतनी पूरी राशि लेना हमेशा उचित निर्णय नहीं होता। अधिक लोन का मतलब अधिक EMI और भविष्य में आर्थिक दबाव भी हो सकता है। आय, अन्य खर्चों और संभावित आपात स्थितियों को ध्यान में रखते हुए उतनी ही राशि का लोन लेना बेहतर माना जाता है, जिसकी मासिक किस्त आसानी से चुकाई जा सके।

कुल ब्याज का भी रखें पूरा हिसाब

Basic Home Loan के CEO और Co-Founder अतुल मोंगा के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति 60 लाख रुपये का होम लोन 20 वर्ष के बजाय 30 वर्ष के लिए लेता है तो उसकी मासिक EMI कम हो सकती है, लेकिन पूरी अवधि में चुकाया जाने वाला ब्याज कई लाख रुपये तक बढ़ सकता है। इसलिए होम लोन लेते समय केवल मासिक किस्त पर नहीं, बल्कि कुल ब्याज, लोन अवधि और अपनी भविष्य की वित्तीय क्षमता का भी संतुलित आकलन करना जरूरी है।

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