SpecialistDoctors – यूपी में विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए नई नीति की तैयारी, गृह जिले में तैनाती पर विचार…
SpecialistDoctors- उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ और सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नई नीति पर काम कर रही है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे प्रस्तावों पर विचार कर रहा है जिनके तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनके गृह जनपद में नियुक्ति या तैनाती का अवसर दिया जा सकता है। साथ ही, उन्हें अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने की योजना भी तैयार की जा रही है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य से विस्तृत प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

विशेषज्ञ चिकित्सकों को आकर्षित करने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सरकारी सेवाओं में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए आकर्षक सुविधाएं जरूरी हैं। प्रस्ताव के अनुसार यदि पति-पत्नी दोनों विशेषज्ञ या सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सक हैं तो उन्हें यथासंभव एक ही गृह जनपद में तैनाती देने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों को मूल वेतन का 30 प्रतिशत और सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों को 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव भी तैयार किया जा रहा है।
जिला अस्पतालों में बढ़ेंगे सुपर स्पेशलिस्ट पद
प्रदेश सरकार जिला स्तर पर गंभीर बीमारियों के उपचार को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठा रही है। इसके लिए न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और अन्य सुपर स्पेशलिटी सेवाओं से जुड़े चिकित्सकों की आवश्यकता का आकलन करने को कहा गया है। प्रस्ताव मिलने के बाद जरूरत के अनुसार नए पद सृजित किए जा सकते हैं, जिससे मरीजों को बड़े शहरों का रुख कम करना पड़े।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर
इसी क्रम में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्टेट हेल्थ सिस्टम्स रिसोर्स सेंटर का रणनीतिक रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस विषय पर पीजीआई में आयोजित दो दिवसीय बैठक में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और अस्पतालों में उपचार व्यवस्था को बेहतर बनाने पर विस्तार से चर्चा की।
डिजिटल हेल्थ और प्रशिक्षण को मिलेगी प्राथमिकता
बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, डिजिटल हेल्थ सिस्टम, रियल टाइम मॉनिटरिंग, गुणवत्ता सुधार और मानव संसाधन विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। जिला स्तर तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए फील्ड कर्मचारियों के प्रशिक्षण को मजबूत करने और आधुनिक डैशबोर्ड आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया।
दीर्घकालिक स्वास्थ्य रणनीति पर मंथन
बैठक में स्वास्थ्य अनुसंधान, नीति विश्लेषण, मॉनिटरिंग एवं मूल्यांकन, स्वास्थ्य अर्थशास्त्र और इम्प्लीमेंटेशन साइंस जैसे क्षेत्रों के लिए अलग तकनीकी प्रभाग स्थापित करने की सिफारिश भी की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यवस्था से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की योजना, निगरानी और क्रियान्वयन अधिक प्रभावी हो सकेगा। फिलहाल डॉक्टरों के लिए प्रस्तावित नई सुविधाओं पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर प्रस्तावों के परीक्षण के बाद लिया जाएगा।