Bihar Education -मदन अहिल्या महिला कॉलेज में पठन-पाठन की गंभीर स्थिति
Bihar Education –राज्य सरकार हर ब्लॉक तक डिग्री कॉलेजों की पहुंच का दावा कर रही है। हाल ही में कई नए शैक्षणिक संस्थानों की शुरुआत भी की गई है, लेकिन नवगछिया क्षेत्र के दो पुराने और प्रमुख कॉलेजों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षकों और कर्मचारियों का भारी अकाल है।

क्षेत्र के प्रमुख मदन अहिल्या महिला महाविद्यालय में हजारों छात्राओं के भविष्य के सामने अनिश्चितता का बादल मंडरा रहा है। इस संस्थान में करीब 3500 से अधिक छात्राएं अलग-अलग सत्रों में नामांकित हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक मौजूद नहीं हैं। कुल स्वीकृत 35 पदों के मुकाबले यहां महज 11 नियमित और 6 अतिथि शिक्षक ही सेवाएं दे रहे हैं।
स्थिति यह है कि गणित, भौतिकी, जीव विज्ञान, बॉटनी, संस्कृत, अर्थशास्त्र और मनोविज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों में एक भी स्थायी शिक्षक नियुक्त नहीं है। एक साथ चार शैक्षणिक सत्रों की कक्षाएं संचालित करना कॉलेज प्रशासन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो चुका है।
जीबी कॉलेज के कई विभागों में लटके ताले
इसी क्षेत्र के एक अन्य बड़े शैक्षणिक संस्थान, गजाधर भगत (जीबी) कॉलेज का हाल भी बहुत अलग नहीं है। स्वीकृत 31 पदों के सापेक्ष यहां केवल 10 नियमित और 7 गेस्ट फैकल्टी कार्यरत हैं।
राजनीति शास्त्र, हिंदी, दर्शनशास्त्र और बॉटनी जैसे मुख्य विभागों में नियमित शिक्षकों की संख्या शून्य है। अन्य कई विभागों में केवल एक-एक शिक्षक के भरोसे पूरी पढ़ाई टिकी हुई है। यदि कोई शिक्षक छुट्टी पर जाता है, तो संबंधित विषय की पढ़ाई पूरी तरह रुक जाती है।
प्रशासनिक और प्रयोगात्मक कार्य पड़े ठप
शैक्षणिक संकट के अलावा इन कॉलेजों में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की किल्लत भी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। लाइब्रेरियन, कैशियर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लैब असिस्टेंट और सुरक्षाकर्मियों के पद सालों से खाली हैं।
प्रयोगशाला सहायकों के न होने से विज्ञान वर्ग के छात्रों की व्यावहारिक पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। वहीं, कार्यालय कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक काम और दाखिले से जुड़ी प्रक्रियाएं सुस्त गति से चल रही हैं।
संसाधनों के संतुलन की उठ रही मांग
कॉलेज प्रशासनों और स्थानीय बुद्धजीवियों ने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय प्रशासन तथा राज्य सरकार से रिक्त पदों पर जल्द से जल्द बहाली करने की अपील की है। उनका मानना है कि नए संस्थानों को खोलने के साथ-साथ मौजूदा कॉलेजों के ढांचे को मजबूत करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।