Nagar Parishad Board Meeting – छात्र प्रदर्शन से बिगड़ा कोरम, नगर परिषद की बोर्ड बैठक लगातार दूसरी बार टली
Nagar Parishad Board Meeting – छात्रों के उग्र प्रदर्शन और जगह-जगह लगे लंबे जाम के चलते शनिवार का दिन नगर परिषद की बैठकों के लिहाज से बेहद निराशाजनक साबित हुआ। शहर की सड़कों पर बने अफरातफरी के माहौल की वजह से कई वार्ड प्रतिनिधि रास्ते में ही फंसे रह गए, जिससे बोर्ड बैठक के लिए जरूरी कोरम पूरा नहीं हो सका। पर्याप्त पार्षदों की मौजूदगी न होने के कारण अंततः बैठक को स्थगित करने का फैसला लेना पड़ा। इस वजह से शहर के विकास से जुड़े कई अहम फैसले अटक गए हैं और बुनियादी सुविधाओं पर होने वाला काम फिलहाल लटक गया है।

सभाकक्ष में अधिकारी करते रहे इंतजार, रास्ते में उलझे रहे पार्षद
नगर परिषद सभागार में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्य पार्षद सेंपी देवी की अध्यक्षता में कार्यवाही शुरू करने की तैयारी थी। वहां उपमुख्य पार्षद किरण गुप्ता, कार्यपालक अधिकारी नीलम श्वेता, सिटी मैनेजर ओम प्रकाश और करीब एक दर्जन पार्षद समय से पहुंच भी चुके थे। इनमें जयप्रकाश गुप्ता, शहाबुद्दीन सिद्दीकी, मुर्तजा अली, अजीत कुमार और नीरज पटेल जैसे चेहरे शामिल थे। हालांकि, शहर के प्रमुख चौराहों पर चल रहे आंदोलनों के कारण बाकी सदस्य समय पर सभाकक्ष तक नहीं पहुंच सके। काफी देर इंतजार करने के बाद जब तय संख्याबल पूरा नहीं हुआ, तो सभापति ने बैठक को आगे के लिए टालने का आधिकारिक ऐलान कर दिया।
नौ बड़े विकास प्रस्तावों पर अंतिम मोहर का था इंतजार
इस महत्वपूर्ण बैठक में शहर की बुनियादी ढांचागत स्थिति को सुधारने के लिए नौ प्रमुख एजेंडों को मंजूरी दी जानी थी। इसमें नगर कोष से विकास योजनाओं में पैसा जारी करने से लेकर मानसून के दौरान शहर के छोटे-बड़े नालों की गहरी सफाई और टूटे हुए स्लैब की मरम्मत जैसे जरूरी मुद्दे शामिल थे। इसके अतिरिक्त सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नए ट्रैक्टर, जेसीबी, ट्रेलर और ट्राइसाइकिल खरीदने के साथ-साथ पुराने खराब पड़े टीपरों की मरम्मत और वाहनों के ईंधन मद में खर्च हुई रकम की समीक्षा पर भी चर्चा होनी थी। पिछली बैठकों में पारित कुछ अन्य प्रस्तावों को भी अंतिम मंजूरी मिलना बाकी था, जो अब ठंडे बस्ते में चला गया है।
दूसरी बार कोरम की वजह से अटकी विकास की रफ्तार
नगर परिषद के कामकाज पर इस तरह ब्रेक लगने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते 16 जुलाई को भी जब बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी, तब भी सदस्यों की कमी यानी कोरम न होने की वजह से उसे रद्द करना पड़ा था। यह लगातार दूसरा मौका है जब जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति ने नगर के प्रशासनिक और विकास कार्यों पर पानी फेर दिया है। दो बार बैठक टलने से शहर के बुनियादी विकास से जुड़ी कई फाइलें सरकारी लालफीताशाही और कागजी प्रक्रिया में उलझ कर रह गई हैं।
मानसूनी मौसम में बढ़ सकती हैं आम जनता की दुश्वारियां
बरसात का मौसम सिर पर है और ऐसे समय में जलनिकासी, नालों की उड़ाही तथा सफाई उपकरणों की खरीद जैसे गंभीर मुद्दों पर फैसला न हो पाना शहरवासियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। अगर आने वाले दिनों में तेज बारिश होती है तो शहर के प्रमुख मोहल्लों में जलजमाव की समस्या विकराल रूप ले सकती है। स्थानीय लोग इस बात से चिंतित हैं कि प्रशासनिक सुस्ती और बैठकों के टलने का खामियाजा अंत में आम नागरिक को ही भुगतना पड़ेगा।
जल्द ही नई तारीख का होगा ऐलान: मुख्य पार्षद
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य पार्षद सेंपी देवी ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि शहर में अचानक उपजे छात्र आंदोलन की वजह से पार्षदों का समय पर पहुंच पाना संभव नहीं हो सका। कोरम पूरा न होने से एजेंडों पर बात नहीं हो पाई। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि शहर के विकास कार्यों को ज्यादा दिनों तक बाधित नहीं रहने दिया जाएगा। बहुत जल्द ही नई तारीख तय करके दोबारा बोर्ड की बैठक आयोजित की जाएगी ताकि ठप पड़े सभी प्रस्तावों पर तेजी से फैसला लिया जा सके।