PayCommission – आगे बढ़ी 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया, अगस्त-सितंबर में कई शहरों में होगी अहम बैठकें
PayCommission – 8वें वेतन आयोग ने विभिन्न विभागों और मंत्रालयों से ऑनलाइन माध्यम से आवश्यक आंकड़े जमा करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। आयोग के डेटा पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। इससे पहले 15 जून तक सुझाव और ज्ञापन भी आमंत्रित किए गए थे। हालांकि, आयोग की परामर्श प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले महीनों में अलग-अलग राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में हितधारकों के साथ विस्तृत बैठकें आयोजित की जाएंगी।

आगे भी जारी रहेगा परामर्श का दौर
आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सभी विभागों और संबंधित पक्षों से केवल आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही जानकारी स्वीकार की जाएगी। ईमेल, हार्ड कॉपी, एक्सेल फाइल या अन्य किसी माध्यम से भेजे गए दस्तावेजों पर विचार नहीं किया जाएगा। अब प्राप्त आंकड़ों और सुझावों के आधार पर आयोग विभिन्न पक्षों के साथ चर्चा का अगला चरण शुरू करेगा, जिससे अंतिम सिफारिशों की रूपरेखा तैयार की जा सके।
एक करोड़ से अधिक लोगों पर पड़ेगा असर
8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का प्रभाव देशभर में एक करोड़ से अधिक लोगों पर पड़ने की संभावना है। इनमें लगभग 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और करीब 65 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं। रक्षा सेवाओं, रेलवे तथा अन्य केंद्रीय विभागों के कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मी भी इस दायरे में आते हैं। आयोग की सिफारिशों के आधार पर वेतन संरचना, पेंशन व्यवस्था, महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लिया जाएगा।
विभिन्न संगठनों से लिए जाएंगे सुझाव
अप्रैल 2026 से आयोग लगातार कर्मचारी संगठनों, मंत्रालयों, पेंशन से जुड़े निकायों, श्रमिक प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ बैठकें कर रहा है। इन बैठकों का उद्देश्य सभी पक्षों की राय जानना और व्यापक सहमति के आधार पर नई वेतन व्यवस्था का मसौदा तैयार करना है। आयोग का कहना है कि प्राप्त आंकड़ों और सुझावों का विस्तृत विश्लेषण करने के बाद ही वेतन, भत्तों और पेंशन से जुड़े प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
अंतिम सिफारिशों पर बनी हुई है नजर
निर्धारित योजना के अनुसार आयोग अपने गठन के लगभग 18 महीने बाद अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। मौजूदा कार्यक्रम के आधार पर इसकी सिफारिशें वर्ष 2027 की शुरुआत से अप्रैल के बीच सामने आ सकती हैं। कर्मचारी संगठनों और विभिन्न प्रतिनिधि समूहों से मिलने वाले सुझाव इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और इन्हीं के आधार पर आयोग अपने निष्कर्ष तैयार करेगा।
अगस्त और सितंबर में इन शहरों में होंगी बैठकें
आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 7 और 10 अगस्त 2026 को दिल्ली में केंद्रीय सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी संगठनों, महासंघों और यूनियनों के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 7 और 8 सितंबर को चेन्नई में संबंधित हितधारकों से चर्चा होगी, जबकि 9 सितंबर को पुडुचेरी में स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इन दोनों स्थानों के इच्छुक पक्ष निर्धारित अंतिम तिथि तक पूर्व अनुमति लेकर भाग ले सकेंगे।
चंडीगढ़ और मुंबई का भी प्रस्तावित दौरा
16 से 18 सितंबर 2026 के बीच आयोग चंडीगढ़ में बैठकें करेगा, जहां पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े प्रतिनिधियों को अपने सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। इसके अतिरिक्त रेलवे मंत्रालय ने संकेत दिया है कि आयोग भविष्य में मुंबई का भी दौरा कर सकता है। प्रस्तावित यात्रा के दौरान केंद्रीय रेलवे क्षेत्र के कार्यालयों का निरीक्षण कर कर्मचारियों की कार्य परिस्थितियों का प्रत्यक्ष आकलन करने की योजना भी बताई गई है।