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Delhi-NCR Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर में सांस लेना भी बन गया सबसे बड़ा खतरा, बंद हुए स्कूल

Delhi-NCR Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर में सर्दी की दस्तक के साथ ही आसमान पर जहरीली धुंध की मोटी चादर छा गई है। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि राजधानी की हवा इंसानी स्वास्थ्य के लिए सीधा खतरा बन गई है। बीते कुछ दिनों से लगातार बढ़ते प्रदूषण ने लोगों की आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और गले की समस्याएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में (Air Quality Index) का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।

Delhi-NCR Air Pollution
Delhi-NCR Air Pollution

AQI 493 के पार, लागू हुआ GRAP का सबसे सख्त चरण

जब दिल्ली का औसत AQI 400 के पार पहुंचा और 493 तक दर्ज किया गया, तब वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने बिना देरी किए GRAP के चरण-4 को लागू कर दिया। यह फैसला 14 दिसंबर को लिया गया, लेकिन इसके बावजूद हालात में कोई खास सुधार नहीं दिखा। लगातार तीसरे दिन राजधानी गैस चैंबर जैसी बनी रही। प्रशासन का मानना है कि (GRAP Stage 4) लागू करना मजबूरी था, क्योंकि इससे पहले के सभी उपाय नाकाफी साबित हुए।


सीवियर प्लस कैटेगरी में पहुंचे कई इलाके

सोमवार को दिल्ली के 11 प्रमुख इलाकों में प्रदूषण का स्तर ‘सीवियर प्लस’ श्रेणी में दर्ज किया गया। इन क्षेत्रों में AQI 450 से ऊपर बना रहा, जो किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है। डॉक्टरों ने लोगों को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। खासकर सुबह और रात के समय हालात और गंभीर हो जाते हैं। (Severe Air Pollution) ने राजधानी की सामान्य रफ्तार को पूरी तरह थाम दिया है।


निर्माण कार्यों पर पूरी तरह लगा ब्रेक

GRAP-4 के तहत सबसे कड़ी पाबंदियां निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर लगाई गई हैं। दिल्ली-एनसीआर में सभी तरह के कंस्ट्रक्शन, डिमोलिशन, खुदाई, पाइलिंग और अर्थवर्क को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट और हाईवे जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स भी ठप हैं, सिवाय इमरजेंसी मरम्मत के। इसका मकसद (Construction Ban) के जरिए धूल और कणों के उत्सर्जन को रोकना है।


उद्योग, जनरेटर और वाहनों पर सख्त नियंत्रण

स्टोन क्रशर, ब्रिक किल्न, हॉट मिक्स प्लांट और माइनिंग यूनिट्स को बंद करने के आदेश दिए गए हैं। कोयला या फर्नेस ऑयल से चलने वाली फैक्ट्रियों पर भी ताला लग गया है। ओपन बर्निंग पूरी तरह प्रतिबंधित है और डीजल जनरेटर केवल इमरजेंसी सेवाओं तक सीमित हैं। वहीं BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल वाहनों की एंट्री पर रोक लगाकर (Vehicle Restriction) को सख्ती से लागू किया गया है।


जरूरी सेवाओं और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को राहत

हालांकि सख्ती के बीच जरूरी सेवाओं को राहत दी गई है। अस्पताल, फायर सर्विस, पावर और वाटर सप्लाई जैसी एसेंशियल सर्विसेज सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। मेट्रो और DTC बसें चलती रहेंगी और अतिरिक्त CNG व इलेक्ट्रिक बसें भी सड़कों पर उतारी जाएंगी। प्रशासन का फोकस (Public Transport) को बढ़ावा देकर निजी वाहनों की संख्या घटाने पर है।


स्कूलों पर प्रदूषण की मार, बच्चों की सेहत प्राथमिकता

प्रदूषण के गंभीर हालात को देखते हुए दिल्ली में नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के सभी स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया गया है। सरकारी, प्राइवेट और सहायता प्राप्त स्कूलों में फिजिकल क्लासेज पर रोक रहेगी और ऑनलाइन पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी। कक्षा 6 से 9 और 11 तक हाइब्रिड मोड अपनाया गया है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए (School Closure) को जरूरी कदम माना जा रहा है।


नोएडा-गाजियाबाद में भी बंद हुए स्कूल

दिल्ली के साथ-साथ नोएडा और गाजियाबाद में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। नोएडा में पांचवीं तक की कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं, जबकि 6 से 12वीं तक हाइब्रिड मोड में पढ़ाई होगी। गाजियाबाद प्रशासन ने भी कक्षा 5 तक के स्कूल बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। पूरे एनसीआर में (NCR School Shutdown) ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।


ऑफिसों में वर्क फ्रॉम होम और ट्रैवल पर असर

दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य कर दिया है। सेंट्रल गवर्नमेंट ऑफिस और NCR के अन्य शहरों में भी यही नियम लागू हैं। वहीं घने कोहरे और प्रदूषण के कारण फ्लाइट्स और ट्रेनें लेट चल रही हैं। एयरलाइंस ने एडवाइजरी जारी की है और यात्रियों से सतर्क रहने को कहा गया है। (Work From Home Rule) से ट्रैफिक और प्रदूषण दोनों को कम करने की कोशिश की जा रही है।

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