Sambhal Anti Power Theft Campaign 2026: संभल में बिजली चोरों पर काल बनकर टूटे डीएम और एसपी, मस्जिद से लेकर मिनी पावर स्टेशन तक का हुआ भंडाफोड़
Sambhal Anti Power Theft Campaign 2026: उत्तर प्रदेश के संभल में सोमवार की तड़के जब पूरा शहर भीषण ठंड के बीच गहरी नींद में डूबा था, तब प्रशासन ने बिजली चोरी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। लगभग एक साल के लंबे अंतराल के बाद, संभल के जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. राजेंद्र पेंसिया और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कृष्ण कुमार बिश्नोई खुद भारी पुलिस बल के साथ सड़कों पर उतरे। (Operational efficiency) का परिचय देते हुए अधिकारियों ने भोर में करीब 4 से 5 बजे के बीच छापेमारी शुरू की। इस अचानक हुई कार्रवाई से अवैध बिजली इस्तेमाल करने वालों के बीच हड़कंप मच गया और किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

रायसत्ती और सरायतरीन में एक साथ धावा
प्रशासन की ओर से गठित करीब एक दर्जन से अधिक टीमों ने शहर के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों, विशेषकर रायसत्ती और सरायतरीन में एक साथ छापेमारी की। जब लोग रजाईयों में सो रहे थे, तब डीएम और एसपी खुद गलियों में पैदल चलकर बिजली के खंभों और मीटरों की सघन जांच कर रहे थे। (Strategic planning) के तहत की गई इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने उन लोगों के होश उड़ा दिए जो सालों से कटिया डालकर सरकार को चूना लगा रहे थे। इस अभियान में भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और महिला पुलिस कर्मियों को भी तैनात किया गया था ताकि किसी भी विरोध से निपटा जा सके।
मस्जिद और मिनी पावर स्टेशन का सनसनीखेज खुलासा
छापेमारी के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे प्रशासन को भी हैरान कर देने वाले थे। रायसत्ती क्षेत्र में एक ऐसा घर पकड़ा गया जो ‘मिनी पावर स्टेशन’ के रूप में काम कर रहा था। यहां एक व्यक्ति ने अवैध रूप से केबल डालकर न केवल अपने घर को रोशन किया था, बल्कि वहीं से (Illegal power distribution) के जरिए आसपास के करीब 40 से 50 घरों को बिजली सप्लाई कर रहा था। इसके अलावा मुस्तफा मस्जिद में भी सीधे तौर पर बिजली चोरी पकड़ी गई। मस्जिद के अंदर भारी लोड वाले उपकरण बिना मीटर के संचालित हो रहे थे, जिस पर टीम ने तत्काल बिजली काटने और कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए।
ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशनों पर बड़ी कार्रवाई
अभियान के दौरान अवैध ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशनों का भी भंडाफोड़ हुआ। शहर के कई इलाकों में ऐसे अड्डे चल रहे थे जहां दर्जनों ई-रिक्शा अवैध रूप से चार्ज किए जा रहे थे। इन स्टेशनों पर किसी भी तरह का वैध कनेक्शन नहीं था और सीधे (Direct cable tapping) के माध्यम से बिजली खींची जा रही थी। ऐसे केंद्रों से न केवल राजस्व की हानि हो रही थी, बल्कि स्थानीय ट्रांसफार्मरों पर अत्यधिक लोड बढ़ने से आम उपभोक्ताओं को लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या का सामना करना पड़ रहा था।
डीएम का कड़ा रुख और कानूनी शिकंजा
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिया कि बिजली चोरी में लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए। उन्होंने कहा कि संभल के इन इलाकों में लाइन लॉस 50 प्रतिशत से अधिक पहुंच गया था, जो सीधे तौर पर (Systematic power theft) की ओर इशारा कर रहा था। डीएम ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी से केवल विभाग को आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि यह ईमानदार उपभोक्ताओं के साथ भी अन्याय है। अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि पकड़े गए सभी दोषियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
स्मार्ट मीटर और भविष्य की तैयारी
प्रशासन ने घोषणा की है कि अब चोरी रोकने के लिए जिले के संदिग्ध इलाकों में विशेष अभियान चलाकर ‘स्मार्ट मीटर’ लगाए जाएंगे। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि (Intelligence gathering) के आधार पर यह अभियान चलाया गया था और आने वाले दिनों में यह कार्रवाई और तेज होगी। ओटीएस यानी एक मुश्त समाधान योजना के बावजूद जो लोग बिजली चोरी का रास्ता अपना रहे हैं, उनके लिए अब जेल ही अंतिम विकल्प होगा। प्रशासन की इस सख्ती से उन इलाकों में भी हड़कंप है जहां अभी छापेमारी नहीं हुई है।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और सफल ऑपरेशन
इस बड़े ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए आठ थानों की पुलिस और कई पुलिस क्षेत्राधिकारियों (सीओ) को मैदान में उतारा गया था। सुबह की इस कार्रवाई में किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए पुख्ता (Security protocol) का पालन किया गया। प्रशासन की इस सक्रियता ने यह संदेश दे दिया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। संभल में शुरू हुआ यह अभियान अब पूरे जिले में एक मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है।