उत्तर प्रदेश

AKTU AI Training and Minor Course Project: अब इंजीनियरों को मिलेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का ब्रह्मास्त्र

AKTU AI Training and Minor Course Project: उत्तर प्रदेश के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) ने अपने एक लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए तकनीकी शिक्षा की नई परिभाषा लिखने की तैयारी कर ली है। कुलपति प्रोफेसर जेपी पांडेय ने एक महत्वकांक्षी योजना का खुलासा किया है, जिसके तहत विश्वविद्यालय को अब एक (Artificial Intelligence Excellence) केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल का सीधा लाभ उन विद्यार्थियों को मिलेगा जो वर्तमान में एकेटीयू से संबद्ध विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं।

AKTU AI Training and Minor Course Project
AKTU AI Training and Minor Course Project

कोर इंजीनियरिंग के साथ अब एआई का अनूठा संगम

एकेटीयू प्रशासन ने यह महसूस किया है कि भविष्य की इंडस्ट्री में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। इसीलिए बीटेक के सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल जैसी (Core Engineering Branches) में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए एआई का ‘माइनर कोर्स’ अनिवार्य रूप से शुरू किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पारंपरिक विधाओं के इंजीनियर भी आधुनिक तकनीक में उतने ही दक्ष हों, जितने कि कंप्यूटर साइंस के छात्र।

इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार मिलेगी व्यावहारिक ट्रेनिंग

केवल डिग्री देना ही विवि का मकसद नहीं है, बल्कि छात्रों को सीधे तौर पर ‘इंडस्ट्री रेडी’ बनाना प्राथमिकता है। कुलपति के अनुसार, विद्यार्थियों को व्यापक स्तर पर (Technical Hands-on Training) प्रदान की जाएगी। इस ट्रेनिंग के माध्यम से छात्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पेचीदगियों को समझेंगे और यह सीखेंगे कि कैसे एआई का उपयोग कंस्ट्रक्शन, मशीनरी और पावर ग्रिड जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

‘सेक्शन 8’ कंपनी का गठन: स्टार्टअप को मिलेगा कॉर्पोरेट सहारा

विश्वविद्यालय ने अपने नवाचार और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एक स्वतंत्र इकाई ‘केसीआईआईएस’ (कलाम सेंटर फॉर इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन ऑफ स्टार्टअप एकेटीयू फाउंडेशन) का गठन किया है। यह एक (Section 8 Nonprofit Organization) के रूप में कार्य करेगी। इस कंपनी की अपनी अलग एचआर पॉलिसी होगी और इसके पास पूर्ण वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार होंगे, जिससे नवाचार से जुड़े कार्यों में लालफीताशाही की बाधा नहीं आएगी।

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तर्ज पर चलेगा प्रबंधन

केसीआईआईएस का ढांचा किसी सरकारी विभाग जैसा नहीं, बल्कि एक प्रोफेशनल कंपनी की तरह होगा। इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में कुलपति, प्रति कुलपति और वित्त अधिकारी के साथ-साथ विशेष (Chief Innovation Officer) और मैनेजर्स शामिल होंगे। यह प्रोफेशनल टीम स्टार्टअप्स को मार्गदर्शन देने से लेकर लैब के लिए आधुनिक सामग्री की खरीद तक के सभी बड़े फैसले स्वतंत्र रूप से लेने में सक्षम होगी।

100 करोड़ की निधि से संवरेगा नवाचार का भविष्य

इस पूरी योजना को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए विश्वविद्यालय ने 100 करोड़ रुपये की एक भारी-भरकम निधि जमा की है। इस (Innovation Fund Endowment) से मिलने वाले ब्याज का उपयोग कंपनी के दैनिक संचालन और शोध कार्यों के लिए किया जाएगा। तीन साल तक इसी फंड के माध्यम से इनोवेशन से जुड़ी मशीनरी और अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर खरीदे जाएंगे, ताकि छात्रों को विश्वस्तरीय संसाधन उपलब्ध हो सकें।

रोजगार के नए अवसरों का खुलेगा बड़ा द्वार

एकेटीयू की इस एआई विवि वाली पहल से राज्य में रोजगार के परिदृश्य में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। जब छात्र अपने मुख्य विषय के साथ-साथ (AI Specialization Certificate) लेकर कैंपस से बाहर निकलेंगे, तो बहुराष्ट्रीय कंपनियां उन्हें प्राथमिकता देंगी। यह मॉडल न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश के तकनीकी संस्थानों के लिए एक प्रेरणा बनेगा, जहाँ आधुनिकता और परंपरा का तालमेल छात्रों के करियर को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

विवि के प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी

एआई विवि के तौर पर खुद को स्थापित करने के लिए एकेटीयू अपने बुनियादी ढांचे में भी सुधार कर रहा है। वित्त अधिकारी और इनोवेशन सेल से जुड़े अधिकारियों को (Strategic Decision Making) प्रक्रिया में अधिक स्वायत्तता दी गई है। कुलपति का विजन है कि एकेटीयू का हर छात्र एआई की भाषा समझे और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खुद को सबसे आगे रखे।

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