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Bangladesh Pakistan ISI Presence Claim: बांग्लादेश में पाकिस्तानी आईएसआई की सक्रियता पर अवामी लीग का बड़ा दावा

Bangladesh Pakistan ISI Presence Claim: बांग्लादेश की राजनीति में मचे उथल-पुथल के बीच अवामी लीग के पूर्व सांसद बहाउद्दीन नसीम ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां की सेना ने बांग्लादेश के भीतर अपनी पैठ बना ली है। नसीम के अनुसार, यह सब मौजूदा अंतरिम प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। (Bangladesh Pakistan ISI Presence Claim) के इन आरोपों ने दक्षिण एशिया के कूटनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। नसीम ने अंदेशा जताया है कि विदेशी शक्तियों का हस्तक्षेप देश की संप्रभुता को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है, जिसे लेकर जनता के बीच गहरा असंतोष और असुरक्षा का भाव पनप रहा है।

Bangladesh Pakistan ISI Presence Claim
Bangladesh Pakistan ISI Presence Claim

ढाका में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की गुप्त आवाजाही

बहाउद्दीन नसीम ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एएनआई से विशेष बातचीत के दौरान विस्तार से बताया कि कैसे पाकिस्तानी अधिकारी बांग्लादेश में सक्रिय हैं। उनका आरोप है कि हाल के महीनों में पाकिस्तान की मिलिट्री इंटेलिजेंस और आईएसआई के दूसरे नंबर के प्रभावशाली अधिकारी लगातार (Foreign Intelligence Interference Dhaka) की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ढाका का दौरा कर रहे हैं। नसीम का दावा है कि ये मुलाकातें केवल औपचारिक नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे एक गहरा राजनीतिक और सामरिक उद्देश्य छिपा है। इन उच्च पदस्थ अधिकारियों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि बांग्लादेश की आंतरिक नीतियों में अब बाहरी ताकतों का दखल बढ़ने लगा है।

शेख हसीना के दौर में आतंकवाद पर लगाम का तर्क

पूर्व सांसद ने अवामी लीग की नेता शेख हसीना के शासनकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पाकिस्तान समर्थित तत्वों को सिर उठाने का मौका नहीं मिला था। उनके मुताबिक, हसीना सरकार ने दक्षिण एशिया में (Terrorist Organization Support Crackdown) के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था और किसी भी विदेशी खुफिया एजेंसी को बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल नहीं करने दिया। उस कालखंड में देश के भीतर सांप्रदायिक सौहार्द और धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक ढांचे को प्राथमिकता दी गई थी। नसीम का तर्क है कि जैसे ही सत्ता का हस्तांतरण हुआ, वैसी ही ताकतें सक्रिय हो गईं जो लंबे समय से बांग्लादेश को अस्थिर करने का मौका तलाश रही थीं।

बंदरगाहों के जरिए बढ़ता व्यावसायिक और रणनीतिक प्रभाव

नसीम ने हाल के घटनाक्रमों को देश की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी बताया है। उन्होंने उदाहरण दिया कि पिछले 54 वर्षों में पहली बार कराची और चटगांव बंदरगाह के बीच सीधा समुद्री संपर्क शुरू किया गया है। यह व्यावसायिक जहाज संचालन (Bilateral Trade Strategic Security) के नाम पर शुरू तो हुआ है, लेकिन नसीम को संदेह है कि इसके पीछे रणनीतिक घुसपैठ छिपी हो सकती है। उनका आरोप है कि नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाला अंतरिम प्रशासन पाकिस्तान के साथ ऐसे संबंधों को बढ़ावा दे रहा है जो भविष्य में देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

संवेदनशील क्षेत्रों में आईएसआई के गुप्त ठिकानों का दावा

अवामी लीग के नेता ने सबसे गंभीर आरोप यह लगाया है कि कुछ वरिष्ठ आईएसआई अधिकारियों ने अब बांग्लादेश के भीतर सुरक्षित ठिकाने बना लिए हैं। इन ठिकानों का इस्तेमाल (National Sovereignty Threat Assessment) के तहत आतंकवादी गतिविधियों को फिर से जीवित करने के लिए किया जा सकता है। नसीम ने चेतावनी दी कि यदि इन गतिविधियों को समय रहते नहीं रोका गया, तो बांग्लादेश की जनता और उसकी आजादी फिर से संकट में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि अवामी लीग इन आरोपित गतिविधियों की कड़े शब्दों में निंदा करती है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस हस्तक्षेप पर ध्यान देने की अपील करती है।

अंतरिम सरकार की वैधता और जन विरोध

बहाउद्दीन नसीम ने मौजूदा प्रशासन को ‘अवैध’ करार देते हुए कहा कि इसके पास जनता का वास्तविक जनादेश नहीं है, इसलिए यह विदेशी दबावों के सामने झुक रहा है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश के आम नागरिक (Civil Society Protest Movements) के माध्यम से किसी भी विदेशी खुफिया एजेंसी की उपस्थिति का विरोध कर रहे हैं। अवामी लीग का कहना है कि वे देश की स्वतंत्रता और स्थिरता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और वे ऐसी किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देंगे जो बांग्लादेश के लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्ष पहचान को नष्ट करने की मंशा रखती हो।

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