बिहार

AgricultureCampaign – बिहार में खेत सुधार और जागरूकता अभियान की हुई शुरुआत

AgricultureCampaign – बिहार में कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने के उद्देश्य से सोमवार से राज्यव्यापी एक माह का विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। यह अभियान 1 जून से 30 जून तक चलेगा और इसका लक्ष्य किसानों को संतुलित खेती, मिट्टी संरक्षण तथा आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना है। अभियान का शुभारंभ पटना स्थित कृषि भवन से किया जाएगा।

bihar farm improvement awareness campaign

राज्य सरकार की इस पहल के तहत किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, हरी खाद अपनाने और खेती की लागत कम करने के उपायों के बारे में जानकारी दी जाएगी। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं से वंचित पात्र किसानों तक लाभ पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

संतुलित उर्वरक उपयोग पर रहेगा जोर

कृषि विभाग के अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों तक यह संदेश पहुंचाना है कि खेत की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का उपयोग किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि रासायनिक खादों के असंतुलित प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और उत्पादन लागत भी बढ़ती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को मिट्टी परीक्षण कराने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरक उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे खेती अधिक वैज्ञानिक और लाभकारी बन सकेगी।

हरी खाद और जैविक विकल्पों को बढ़ावा

अभियान के दौरान हरी खाद, जैविक खेती और विभिन्न बायो-आधारित उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि विशेषज्ञ गांवों और खेतों तक पहुंचकर किसानों को इन विकल्पों के व्यावहारिक लाभ समझाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैविक और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बढ़ने से मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की उत्पादन लागत में भी कमी आ सकती है।

जलवायु परिवर्तन के अनुसार खेती की सलाह

बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए कृषि वैज्ञानिक किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सलाह देंगे। खेतों में जाकर उन्हें कम पानी वाली फसलों, फसल विविधीकरण और संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी जाएगी।

कृषि विभाग का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को देखते हुए खेती की पारंपरिक पद्धतियों में सुधार जरूरी हो गया है। इसी कारण वैज्ञानिकों की विशेष टीमें सीधे किसानों से संवाद करेंगी।

जनप्रतिनिधियों से सहयोग की अपील

अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग मांगा गया है। गांवों में बैठकों और चौपालों के माध्यम से किसानों को जागरूक करने की योजना बनाई गई है।

विभाग का मानना है कि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से किसानों तक संदेश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी आसानी से उपलब्ध होगी।

योजनाओं का लाभ गांव तक पहुंचाने की तैयारी

इस विशेष अभियान के दौरान पात्र किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का भी लक्ष्य रखा गया है। किसान क्रेडिट कार्ड और पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं से अभी तक वंचित किसानों की पहचान कर उन्हें लाभ दिलाने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।

इसके अलावा कृषि यांत्रिकीकरण और दलहन-तिलहन प्रोत्साहन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी भी सीधे गांव स्तर तक पहुंचाई जाएगी, ताकि अधिक से अधिक किसान इनका लाभ उठा सकें।

विशेष टीमें करेंगी निगरानी

राज्य के सभी जिलों के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। इनमें कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ और अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल हैं।

जिन क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग औसत से अधिक पाया गया है, वहां विशेष निगरानी और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इन टीमों का उद्देश्य किसानों को संतुलित खेती की दिशा में प्रेरित करना और दीर्घकालिक कृषि सुधार को बढ़ावा देना है।

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