BiharGovernor – सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन बने बिहार के नए राज्यपाल
BiharGovernor – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार देर रात एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए बिहार सहित आठ राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की। इसी क्रम में बिहार के मौजूदा राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को पद से हटाकर उनकी जगह भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन को राज्यपाल नियुक्त किया गया है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब राज्य की राजनीति में भी हलचल तेज है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनने की चर्चा के बीच बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में नए राज्यपाल की नियुक्ति को प्रशासनिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

सेना में लंबा अनुभव रखने वाले अधिकारी हैं सैयद अता हसनैन
नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के अनुभवी और सम्मानित अधिकारियों में गिने जाते हैं। उन्होंने लगभग चार दशकों तक सेना में सेवा दी और 2013 में सैन्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए। अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और वहां 15वीं कोर की कमान भी संभाली। रणनीतिक और सुरक्षा मामलों पर उनकी गहरी समझ के कारण उन्हें रक्षा क्षेत्र में एक विशेषज्ञ के रूप में देखा जाता है।
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर योगदान दिया। वर्ष 2018 में उन्हें कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। इसके अलावा वह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। उनका पारिवारिक पृष्ठभूमि भी सैन्य परंपरा से जुड़ा रहा है, क्योंकि उनके पिता मेजर जनरल सईद महदी हसनैन भी भारतीय सेना में अधिकारी थे।
सैन्य अभियानों में सक्रिय भूमिका
अपने करियर के दौरान सैयद अता हसनैन कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों का हिस्सा रहे। उन्होंने 1988 से 1990 के बीच श्रीलंका में चलाए गए ऑपरेशन पवन में भाग लिया था। इसके बाद 1990-91 के दौरान पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी उनकी भूमिका रही। इन अभियानों में योगदान के लिए उन्हें कई सैन्य सम्मान और पदक भी प्राप्त हुए हैं।
उनकी शिक्षा भारत और विदेश दोनों जगह हुई है। उन्होंने नैनीताल और दिल्ली में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, जबकि उच्च शिक्षा के लिए लंदन के किंग्स कॉलेज में अध्ययन किया। सैन्य रणनीति और सुरक्षा मामलों पर उनके विचार अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहे हैं।
पिछले एक दशक में कई बार बदले राज्यपाल
बिहार में पिछले दस वर्षों के दौरान राज्यपाल पद पर कई बदलाव देखने को मिले हैं। इस अवधि में सात अलग-अलग व्यक्तियों ने राज्यपाल का पद संभाला। औसतन देखा जाए तो हाल के वर्षों में बिहार में किसी राज्यपाल का कार्यकाल लगभग डेढ़ से दो वर्ष के बीच ही रहा है।
सैयद अता हसनैन से पहले आरिफ मोहम्मद खान इस पद पर कार्यरत थे। उनसे पहले राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने 17 फरवरी 2023 से 1 जनवरी 2025 तक राज्यपाल के रूप में कार्य किया था। इसके पहले फागू चौहान 29 जुलाई 2019 से 16 फरवरी 2023 तक इस पद पर रहे। इसी तरह लालजी टंडन, सत्यपाल मलिक और केशरी नाथ त्रिपाठी भी अलग-अलग अवधियों में बिहार के राज्यपाल रह चुके हैं।
अन्य राज्यों में भी नई नियुक्तियां
राष्ट्रपति की घोषणा के तहत अन्य राज्यों में भी कुछ महत्वपूर्ण नियुक्तियां की गई हैं। बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव को नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे नंदकिशोर यादव को प्रशासनिक अनुभव के आधार पर यह जिम्मेदारी दी गई है।
केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर राज्यपाल पद पर ऐसे बदलाव किए जाते हैं ताकि संवैधानिक पदों पर अनुभवी और योग्य व्यक्तियों को जिम्मेदारी सौंपी जा सके। बिहार में नए राज्यपाल की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राज्य की राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं, इसलिए आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।



