BPSCScam – नौकरी दिलाने के नाम पर 40 लाख ठगी का मामला दर्ज…
BPSCScam – बिहार में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़ा मामला सामने आने के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। पटना में तैनात एक महिला दारोगा के बेटे को बीपीएससी परीक्षा के जरिए नौकरी दिलाने के नाम पर 40 लाख रुपये की ठगी के आरोप में जदयू नेता डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

ईओयू ने जिन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है, उनमें डॉ. धर्मेंद्र कुमार के अलावा उनके पिता ब्रजकिशोर प्रसाद, पत्नी डॉ. रजनी, महिला दारोगा आशा सिंह और उनके बेटे रितेश कुमार के नाम शामिल हैं। मामले की जांच की जिम्मेदारी ईओयू की डीएसपी स्वाति कृष्णा को सौंपी गई है।
नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने का आरोप
आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, पटना जिला पुलिस बल में कार्यरत महिला दारोगा आशा सिंह ने अपने बेटे को सरकारी नौकरी दिलाने की उम्मीद में बड़ी रकम दी थी। आरोप है कि बीपीएससी परीक्षा में चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर 40 लाख रुपये डॉ. धर्मेंद्र कुमार और अन्य आरोपितों को सौंपे गए।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, तय वादे के अनुसार नौकरी नहीं मिलने पर आरोपितों की ओर से 25 लाख रुपये लौटाने के लिए एक चेक दिया गया था। हालांकि, बैंक में प्रस्तुत किए जाने पर वह चेक बाउंस हो गया। इसके बाद पूरा मामला कानूनी विवाद में बदल गया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में
डॉ. धर्मेंद्र कुमार चंद्रवंशी का नाम बिहार की राजनीति में जाना-पहचाना माना जाता है। वे पहले राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े रहे और कुम्हरार विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके हैं। बाद में वे जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। वर्तमान में वे पार्टी संगठन में प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
इस प्रकरण में राजनीतिक कनेक्शन सामने आने के बाद विपक्षी दल भी सरकार और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाने लगे हैं। हालांकि, अब तक किसी राजनीतिक दल की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पहले भी दर्ज हुआ था मामला
जानकारी के अनुसार, इस विवाद को लेकर जनवरी 2024 में पटना के जक्कनपुर थाने में भी एक मामला दर्ज किया गया था। उस समय पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल कर केस का अनुसंधान बंद कर दिया था। बाद में मामले को लेकर पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एक बार फिर पूरे प्रकरण की जांच शुरू हुई। इसके बाद पटना सदर के एसडीपीओ ने दोबारा जांच रिपोर्ट तैयार की, जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि सरकारी सेवा में रहते हुए महिला दारोगा ने बेटे की नौकरी के लिए विभिन्न माध्यमों से धन की व्यवस्था की थी।
जांच एजेंसियां वित्तीय लेनदेन खंगाल रहीं
ईओयू अब इस मामले में पैसों के लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित रकम किन माध्यमों से दी गई और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, मामले से जुड़े बैंक खातों और मोबाइल रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। यदि जांच में और सबूत सामने आते हैं तो आरोपितों से पूछताछ का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। बीते कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक से जुड़े कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में इस प्रकरण ने युवाओं और अभ्यर्थियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।