BudgetSessionClash – बिहार विधान परिषद में तीखी बहस और तंज
BudgetSessionClash – बिहार विधानमंडल के बजट सत्र में इन दिनों सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल रही है। बुधवार को विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान माहौल कुछ ऐसा बना कि तंज, आरोप और यहां तक कि शेर-ओ-शायरी भी चर्चा का हिस्सा बन गई। सदन में मौजूद मुख्यमंत्री की मौजूदगी में नेताओं के बीच तीखे संवाद हुए, जिन पर कभी ठहाके गूंजे तो कभी गंभीर टिप्पणी भी सामने आई।

भोजनावकाश के बाद बढ़ी तल्खी
विभागीय बजट पर चर्चा के दौरान राजद के वरिष्ठ सदस्य अब्दुल बारी सिद्दिकी ने उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री सम्राट चौधरी सहित वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव पर सवाल उठाए। जवाबी हमलों के साथ माहौल गर्म हो गया। सिद्दिकी ने सम्राट चौधरी की ओर इशारा करते हुए टिप्पणी की, जिस पर गृहमंत्री खड़े हो गए और कहा कि सदन में ही उन्हें धमकी दी जा रही है। उपसभापति डॉ. रामवचन राय ने हल्के अंदाज में इसे दो पुराने साथियों की बहस बताया, जिससे कुछ देर के लिए तनाव कम हुआ।
तंज और ठहाकों के बीच संवाद
बहस के दौरान व्यक्तिगत कटाक्ष भी सुनाई दिए। सम्राट चौधरी ने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की तो सिद्दिकी ने भी उसी अंदाज में जवाब दिया। दोनों पक्षों की बातों पर सदन में मौजूद सदस्य हंसते नजर आए। यह सिलसिला कुछ देर तक चलता रहा, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी सीट पर बैठे हुए मुस्कुराते रहे।
गजल से सजी राजनीतिक बहस
सत्र का एक दिलचस्प पल तब आया जब सिद्दिकी ने अपनी बात खत्म करते हुए गजल की पंक्तियां सुनाईं। उन्होंने वित्त मंत्री पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वरिष्ठता के बावजूद निर्णय लेने में स्वतंत्रता दिखनी चाहिए। इसके बाद उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल खड़े हुए और उसी गजल की अगली पंक्ति गाकर माहौल को और हल्का कर दिया। सदन में बैठे सदस्यों ने इस पर जोरदार प्रतिक्रिया दी।
वित्त मंत्री का पलटवार
वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव ने जवाब देते हुए पूर्ववर्ती सरकारों के दौर की चर्चा की। उन्होंने कहा कि राज्य ने अतीत में कई चुनौतियां देखी हैं, लेकिन वर्तमान में स्थिति बदली है। बिजली, सड़क और अन्य क्षेत्रों में सुधार का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब बिहार विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने पुराने घोटालों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ने अपने विश्वास के आधार पर फैसला दिया है।
राजनीतिक माहौल और आगे की राह
बजट सत्र के दौरान हुई इस बहस ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। हालांकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन शब्दों की तीक्ष्णता ने माहौल को कुछ देर के लिए गरमा दिया। आने वाले दिनों में बजट पर चर्चा जारी रहेगी और संभावना है कि सत्ता और विपक्ष के बीच ऐसी बहसें आगे भी देखने को मिलें।


