Cyber Fraud – पंचायत चुनाव से पहले तेज हुई जनप्रतिनिधियों को ठगने की साजिश
Cyber Fraud – बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच साइबर अपराधियों की सक्रियता एक बार फिर चिंता का कारण बन गई है। प्रशासन जहां चुनावी प्रक्रिया को सुचारु बनाने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर कई जिलों से जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। अज्ञात नंबरों से आ रहे कॉल और संदेशों में खुद को सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है।

फर्जी कॉल के जरिए मानदेय का झांसा
जानकारी के अनुसार साइबर ठग मुखिया और वार्ड सदस्यों को कॉल कर यह दावा कर रहे हैं कि उनका बकाया मानदेय सरकारी खजाने से जारी कर दिया गया है। भुगतान प्राप्त करने के नाम पर उनसे बैंक खाता विवरण, आधार नंबर और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी मांगी जा रही है। कई मामलों में ठगों ने व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए ऐसे लिंक भी भेजे हैं, जिन पर क्लिक करते ही मोबाइल और बैंक खाते की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के लिंक पर क्लिक करना आर्थिक नुकसान का बड़ा कारण बन सकता है।
संगठित गिरोह की आशंका, पुलिस जांच में जुटी
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच तेज कर दी है। कटिहार के साइबर थाना प्रभारी सह यातायात डीएसपी सद्दाम हुसैन के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि इसके पीछे किसी संगठित साइबर गिरोह का हाथ हो सकता है। आशंका है कि इस गिरोह ने जनप्रतिनिधियों का डेटा हासिल कर उनके नंबरों तक पहुंच बनाई है। पुलिस उन संदिग्ध मोबाइल नंबरों को ट्रैक कर रही है, जिनसे लगातार कॉल किए जा रहे थे, ताकि गिरोह की पूरी संरचना का पता लगाया जा सके।
चुनावी माहौल में बढ़ा साइबर खतरा
चुनावी समय को देखते हुए साइबर ठगों की सक्रियता और अधिक बढ़ गई है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे समय में लोग प्रशासनिक कार्यों और वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़ी सूचनाओं को लेकर अधिक संवेदनशील होते हैं, जिसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं। इसी वजह से लगातार जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है।
प्रशासन की अपील और सुरक्षा निर्देश
प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी सरकारी योजना या मानदेय भुगतान के लिए फोन पर व्यक्तिगत जानकारी या ओटीपी नहीं मांगा जाता है। सभी प्रक्रियाएं आधिकारिक माध्यमों से ही पूरी की जाती हैं। पुलिस ने जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, संदेश या लिंक पर भरोसा न करें और तुरंत इसकी जानकारी साइबर थाने को दें।
साथ ही यह भी कहा गया है कि जागरूकता ही ऐसे साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करने से न केवल नुकसान रोका जा सकता है, बल्कि अपराधियों तक पहुंचने में भी मदद मिलती है।