झारखण्ड

Healthcare – झारखंड की जेलों में डॉक्टरों की कमी पर हाई कोर्ट सख्त

Healthcare – झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य की जेलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। गुरुवार को एक आपराधिक अपील की सुनवाई के दौरान अदालत को जानकारी दी गई कि एक बंदी की जेल में पर्याप्त इलाज नहीं मिलने के कारण मौत हो गई। इस सूचना के बाद अदालत ने पूरे मामले को व्यापक सार्वजनिक महत्व का मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया और राज्य की जेलों में डॉक्टरों की कमी को लेकर जनहित याचिका दर्ज कर दी।

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मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ कर रही थी। अदालत को बताया गया कि अपीलकर्ता लंबे समय से किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी से जूझ रहा था और उसने इलाज के लिए सजा स्थगित कर निजी अस्पताल में भर्ती होने की अनुमति मांगी थी।

बंदी ने पहले ही जताई थी इलाज को लेकर चिंता

याचिका में बंदी की ओर से कहा गया था कि जेल के भीतर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं उसकी बीमारी के उपचार के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उसने अदालत से अनुरोध किया था कि उसे जमानत या अस्थायी राहत दी जाए ताकि वह जेल से बाहर बेहतर चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सके।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए कुछ समय मांगा था। हालांकि सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत किए जाने से पहले ही अदालत को सूचित किया गया कि बंदी की जेल में मौत हो चुकी है।

अदालत ने मांगा जेलों में खाली पदों का विवरण

मृत्यु की जानकारी सामने आने के बाद हाई कोर्ट ने पूरे मामले को गंभीर माना और राज्य सरकार से जेलों में डॉक्टरों के रिक्त पदों की स्थिति पर विस्तृत जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि राज्य की विभिन्न जेलों में डॉक्टरों के 43 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से 42 पद खाली पड़े हुए हैं।

अदालत को यह भी बताया गया कि कई जेलों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा ढांचे की स्थिति संतोषजनक नहीं है। गंभीर बीमारियों से पीड़ित कैदियों के इलाज के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी बनी हुई है।

परिजनों को मुआवजे की मांग की अनुमति

खंडपीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मृतक बंदी के परिजनों को राज्य सरकार से मुआवजे की मांग करने की अनुमति भी दी है। अदालत ने इस पूरे प्रकरण को जनहित से जुड़ा मानते हुए इसे आगे की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष भेज दिया है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति और कैदियों के मूल अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण बहस को आगे बढ़ा सकता है।

राज्य की कई जेलों में संसाधनों की चुनौती

झारखंड में इस समय छह केंद्रीय कारागार संचालित हैं, जिनमें रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर, दुमका और गिरिडीह शामिल हैं। इसके अलावा कई जिला जेल और उप-जेल भी राज्य में कार्यरत हैं। लंबे समय से जेलों में चिकित्सकों की नियुक्ति और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

अब हाई कोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार पर जेलों की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का दबाव बढ़ सकता है। आने वाली सुनवाई में अदालत सरकार से नियुक्तियों और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी मांग सकती है।

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