बिहार

Storm Damage – बिहार में आंधी-बारिश से 13 की मौत, जनजीवन प्रभावित…

Storm Damage – बिहार में बुधवार की रात से लेकर गुरुवार सुबह तक आए तेज आंधी-तूफान, भारी बारिश और ओलावृष्टि ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। मुजफ्फरपुर, मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, पूर्वी-पश्चिमी चंपारण, हाजीपुर, छपरा और बेगूसराय समेत कई क्षेत्रों में अलग-अलग हादसों में कुल 13 लोगों की जान चली गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। तेज हवाओं के कारण पेड़, बिजली के खंभे और तार बड़े पैमाने पर गिर गए, जिससे पूरे इलाके में बिजली व्यवस्था चरमरा गई।

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जनहानि और हादसों की श्रृंखला

तूफान के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान पेड़ों और ढांचों के गिरने से हुआ। बेगूसराय के रतनपुर थाना क्षेत्र में निर्माणाधीन भवन की दीवार गिरने से एक युवक की मौत हो गई। हाजीपुर में पेड़ गिरने से छह वर्षीय बच्चे की जान चली गई, जबकि छपरा के मढ़ौरा इलाके में एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। औरंगाबाद में वज्रपात की चपेट में आने से एक बारात में शामिल व्यक्ति की मृत्यु हो गई।

मधुबनी जिले में भी स्थिति गंभीर रही, जहां कई जगह ठनका गिरने से लोग घायल हुए और कुछ स्थानों पर घरों को नुकसान पहुंचा। दरभंगा और समस्तीपुर में भी पेड़ गिरने की घटनाओं में लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई परिवारों में अचानक हुई इन घटनाओं से मातम का माहौल है।

कई जिलों में बुनियादी ढांचे को नुकसान

तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में पेड़ सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात घंटों बाधित रहा। कई मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गए और ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क शहरों से टूट गया। बिजली के खंभे और तार गिरने से रातभर कई जिलों में बिजली आपूर्ति ठप रही।

रेलवे ट्रैक पर पेड़ गिरने की घटनाओं से कुछ रेलखंडों पर ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। यात्रियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और कई ट्रेनों को नियंत्रित गति से चलाना पड़ा।

खेतों और फसलों को भारी नुकसान

ओलावृष्टि और तेज हवाओं का सबसे बड़ा असर कृषि पर पड़ा है। आम और लीची के बागानों को व्यापक नुकसान हुआ है, जिससे इस साल की उपज पर बड़ा असर पड़ सकता है। गेहूं और मक्का की खड़ी फसल भी कई इलाकों में बर्बाद हो गई है।

हालांकि कुछ क्षेत्रों में बारिश से हरी सब्जियों, मूंग और गन्ने की फसल को थोड़ी राहत मिली है, लेकिन कुल मिलाकर नुकसान का स्तर काफी अधिक बताया जा रहा है। किसान संगठनों ने सरकार से जल्द सर्वे कर मुआवजा देने की मांग की है।

प्रशासन की निगरानी और राहत कार्य

स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित जिलों में स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है। जहां-जहां पेड़ गिरने या बिजली व्यवस्था बाधित होने की सूचना मिली, वहां मरम्मत और राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

आपदा प्रबंधन टीमें भी सक्रिय हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की राहत और सहायता प्रक्रिया तय की जाएगी।

इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर मौसम की अनिश्चितता और आपात तैयारियों की जरूरत को सामने ला दिया है।

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