बिहार

CyberFraud – पारिवारिक नेटवर्क बनाकर चलाया जा रहा था ठगी का गिरोह

CyberFraud – पटना में साइबर अपराध के एक ऐसे मामले का खुलासा हुआ है, जिसमें पारिवारिक रिश्तों का इस्तेमाल कथित रूप से लोगों को ठगने के लिए किया जा रहा था। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एक भाई, उसकी पत्नी और साले को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह समूह बिहार समेत कई राज्यों के सैकड़ों लोगों को निशाना बनाकर आर्थिक धोखाधड़ी कर चुका है।

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साइबर पुलिस की टीम ने मेहंदीगंज थाना क्षेत्र के नवनीत नगर स्थित एक किराये के मकान में छापेमारी कर तीन आरोपियों को हिरासत में लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह समूह लंबे समय से फोन कॉल और डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था। पुलिस के अनुसार, मामले में दो अन्य संदिग्ध अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

गुप्त सूचना के बाद हुई कार्रवाई

साइबर डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि पुलिस को इलाके में साइबर अपराध से जुड़े एक सक्रिय नेटवर्क की सूचना मिली थी। इसके बाद विशेष टीम बनाकर निगरानी की गई और पर्याप्त जानकारी जुटाने के बाद कार्रवाई की गई।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नालंदा जिले के रहने वाले गौरव राज, उसकी पत्नी सपना कुमारी और उसके साले निखिल कुमार के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, आधार दस्तावेज और एक लैपटॉप बरामद किया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

फोन कॉल के जरिए लोगों को बनाते थे निशाना

पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी खुद को बैंक या वित्तीय सेवा संस्थानों से जुड़ा बताकर लोगों से संपर्क करते थे। वे लोन मंजूरी, एटीएम सेवा, कार्ड अपग्रेड और अन्य बैंकिंग सुविधाओं के नाम पर लोगों से बातचीत करते थे।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, आरोपियों द्वारा प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों को कॉल किए जाते थे। इनमें से कुछ लोग झांसे में आ जाते थे, जिसके बाद उनसे विभिन्न तरीकों से धनराशि हासिल की जाती थी। पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण कर रही है ताकि ठगी की वास्तविक रकम और पीड़ितों की संख्या का पता लगाया जा सके।

तकनीकी शिक्षा प्राप्त आरोपी पर जांच का फोकस

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का कथित मुख्य संचालक गौरव राज तकनीकी शिक्षा प्राप्त है और उसने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। जांच में पता चला है कि वह रोजगार की तलाश में था, लेकिन बाद में कथित रूप से साइबर अपराध की गतिविधियों में शामिल हो गया।

अधिकारियों का कहना है कि इस काम में उसके परिवार के कुछ सदस्य भी सहयोग कर रहे थे। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इस नेटवर्क की पहुंच किन राज्यों तक थी और कितने लोग इसके शिकार बने।

फरार आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस का कहना है कि मामले में दो अन्य संदिग्धों की भूमिका भी सामने आई है। दोनों फिलहाल गिरफ्त से बाहर हैं और उनकी तलाश के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया गया है। जांच एजेंसियां डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और बैंकिंग दस्तावेजों के आधार पर नेटवर्क की पूरी संरचना समझने का प्रयास कर रही हैं।

साइबर अपराध पर बढ़ी निगरानी

हाल के महीनों में पटना और आसपास के क्षेत्रों में साइबर अपराध से जुड़े कई मामलों का खुलासा हुआ है। पुलिस का कहना है कि ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और डिजिटल धोखाधड़ी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि बैंकिंग या वित्तीय सेवाओं से जुड़े किसी भी फोन कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

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