Healthcare – श्रावणी मेले में कांवरियों के लिए होगी 129 डॉक्टरों की विशेष तैनाती
Healthcare – श्रावणी मेला 2026 के दौरान सुल्तानगंज से देवघर तक जल लेकर जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बिहार स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग ने घोषणा की है कि कांवरिया पथ पर एक महीने तक चलने वाले मेले के दौरान 17 जिलों से कुल 129 डॉक्टरों की तैनाती की जाएगी। ये डॉक्टर भागलपुर, बांका और मुंगेर जिले में स्थापित स्वास्थ्य शिविरों में चौबीसों घंटे सेवाएं देंगे। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में संबंधित जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं। यह विशेष व्यवस्था 30 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 तक प्रभावी रहेगी।

42 स्वास्थ्य शिविरों में मिलेगी चिकित्सा सुविधा
मेले के दौरान मुख्य कांवरिया मार्ग पर कुल 42 अस्थायी स्वास्थ्य शिविर संचालित किए जाएंगे। इन शिविरों में डॉक्टरों के अलावा नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट और लैब टेक्नीशियन भी तैनात रहेंगे। भागलपुर जिले के 13 शिविरों में 39 डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें खगड़िया, नवादा, कटिहार और गया के चिकित्सक शामिल हैं।
बांका और मुंगेर में भी विशेष व्यवस्था
बांका जिले के 16 स्वास्थ्य शिविरों में 45 डॉक्टरों की तैनाती की गई है। यहां लखीसराय, शेखपुरा, पूर्णिया, बेगूसराय और नालंदा से आए चिकित्सक अपनी सेवाएं देंगे। वहीं, मुंगेर जिले के 13 शिविरों में भी 45 डॉक्टर नियुक्त किए गए हैं। इन शिविरों में पटना, वैशाली, भोजपुर, मधेपुरा और जमुई के डॉक्टर श्रद्धालुओं का उपचार करेंगे।
आपात स्थिति के लिए भी तैयारी
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सुल्तानगंज से देवघर तक की पैदल यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को डिहाइड्रेशन, थकान, पैरों में छाले, बुखार, चोट या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रत्येक शिविर में प्राथमिक उपचार की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। मुफ्त दवाएं, ओआरएस, ग्लूकोज, दर्द निवारक दवाएं और प्राथमिक चिकित्सा सामग्री पर्याप्त मात्रा में रखी जाएगी।
एम्बुलेंस रहेगी चौबीसों घंटे उपलब्ध
गंभीर रूप से बीमार या घायल श्रद्धालुओं को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए पूरे कांवरिया मार्ग पर एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध रहेगी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उद्देश्य यह है कि यात्रा के दौरान किसी भी श्रद्धालु को उपचार के अभाव में परेशानी का सामना न करना पड़े और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता मिल सके।