Stock Market Holiday – मुहर्रम पर बंद रहेंगे शेयर बाजार, जानें कब शुरू होगा कारोबार…
Stock Market Holiday – मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार, 26 जून को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। इस दिन नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों बंद रहेंगे। एक्सचेंजों की आधिकारिक अवकाश सूची के अनुसार इक्विटी, डेरिवेटिव, करेंसी डेरिवेटिव, NDS-RST और Tri-Party Repo सहित सभी प्रमुख ट्रेडिंग सेगमेंट में पूरे दिन लेनदेन स्थगित रहेगा। अब नियमित कारोबार अगले कारोबारी दिन फिर से शुरू होगा।

साल 2026 की छुट्टियों में शामिल है मुहर्रम
मुहर्रम इस वर्ष शेयर बाजार के निर्धारित अवकाशों में शामिल है। इससे पहले बकरीद के अवसर पर मई के अंत में बाजार बंद रहा था। अब मुहर्रम के बाद अगला एक्सचेंज अवकाश 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर होगा। वर्ष 2026 के लिए कुल 16 ट्रेडिंग हॉलीडे तय किए गए हैं, जिनमें से नौ अवकाश पहले ही पूरे हो चुके हैं। साल के शेष महीनों में बाजार सात और अवसरों पर बंद रहेगा।
आने वाले महीनों में कब-कब रहेगा अवकाश
एक्सचेंज कैलेंडर के अनुसार, 2 अक्टूबर को गांधी जयंती, 20 अक्टूबर को दशहरा, 10 नवंबर को दिवाली बलिप्रतिपदा, 24 नवंबर को गुरु नानक जयंती और 25 दिसंबर को क्रिसमस के अवसर पर भी शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। 25 दिसंबर वर्ष 2026 का आखिरी आधिकारिक ट्रेडिंग अवकाश रहेगा।
इसके अलावा कुछ प्रमुख पर्व ऐसे भी हैं जो शनिवार या रविवार को पड़ रहे हैं। चूंकि इन दिनों बाजार पहले से बंद रहता है, इसलिए इनके लिए अलग से अतिरिक्त ट्रेडिंग अवकाश नहीं मिलेगा। इनमें महाशिवरात्रि, ईद-उल-फितर, स्वतंत्रता दिवस और दिवाली लक्ष्मी पूजन शामिल हैं।
MCX में रहेगा आंशिक अवकाश
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 26 जून को पूरे दिन की छुट्टी नहीं रहेगी। सुबह का ट्रेडिंग सत्र सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बंद रहेगा, जबकि शाम का सत्र निर्धारित समय के अनुसार दोबारा शुरू होगा। इस दौरान शाम 5 बजे के बाद कमोडिटी कारोबार सामान्य रूप से संचालित किया जाएगा। एमसीएक्स की वार्षिक अवकाश सूची में पूर्ण और आंशिक दोनों तरह की छुट्टियां शामिल हैं।
पिछले कारोबारी दिन बाजार में रही तेजी
अवकाश से पहले गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार सकारात्मक बढ़त के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में करीब 0.7 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक निवेश धारणा में सुधार के कारण देखने को मिली।
कच्चे तेल की नरमी से मिला समर्थन
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.7 प्रतिशत गिरकर 72.5 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई थी, जो हाल के दिनों में 73 डॉलर से नीचे का स्तर है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक शांति समझौते की खबरों के बाद तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ कम हुईं। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने के संकेत भी बाजार के लिए सकारात्मक रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगाई और आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से राहत देने वाली स्थिति मानी जाती है।