InfrastructureAlert – गंडक नदी पुल में बढ़ती दरारों से प्रशासन की चिंता गहरी
InfrastructureAlert – बिहार में गोपालगंज और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाले गंडक नदी पर बने मंगलपुर महासेतु में लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। पहले जहां पुल के केवल एक हिस्से में दरार देखी गई थी, वहीं अब अलग-अलग स्थानों पर स्पैन में कई नई दरारें मिलने के बाद स्थिति को गंभीर माना जा रहा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पुल पर भारी वाहनों के संचालन पर तत्काल रोक लगा दी है और विशेषज्ञों की टीम को मौके पर बुलाया गया है।

जिला प्रशासन के अनुसार पुल के पाया संख्या 12 और 13 के बीच करीब 12 इंच का अंतर दिखाई दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत नहीं हुई तो संरचना को और नुकसान पहुंच सकता है। जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने बताया कि पुल की स्थिति की तकनीकी जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
मरम्मत और जांच पर बढ़ा फोकस
राज्य सरकार पहले से ही बिहार के बड़े पुलों की स्थिति की समीक्षा करा रही है। भागलपुर स्थित विक्रमशिला पुल से जुड़ी घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री स्तर से सभी प्रमुख पुलों की सुरक्षा जांच के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में इंजीनियरों ने मंगलपुर पुल का निरीक्षण किया और कई हिस्सों में तकनीकी कमजोरी की आशंका जताई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुल के दोनों किनारों पर बैरिकेडिंग कर दी गई है ताकि भारी वाहनों का दबाव कम किया जा सके। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल छोटे वाहनों की आवाजाही नियंत्रित तरीके से जारी है, लेकिन सुरक्षा को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा।
यातायात और व्यापार पर असर
यह पुल उत्तर प्रदेश के कई जिलों जैसे गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और बिहार के सीवान, गोपालगंज सहित नेपाल सीमा की ओर जाने वाले वाहनों के लिए अहम संपर्क मार्ग माना जाता है। भारी वाहनों की आवाजाही बंद होने से माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने लगा है। स्थानीय परिवहन व्यवसायियों का कहना है कि वैकल्पिक रास्तों से लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं।
करीब 550 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस महासेतु का उद्घाटन वर्ष 2016 में किया गया था। ऐसे में एक दशक के भीतर पुल में इस तरह की तकनीकी समस्याएं सामने आने पर निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
पहले भी सामने आ चुकी हैं समस्याएं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब पुल से जुड़ी चिंता सामने आई हो। करीब दो वर्ष पहले भारी बारिश और नदी में कटाव के कारण एप्रोच सड़क में भी दरारें आ गई थीं। उस समय सड़क कई जगह धंस गई थी और किनारों पर बड़े गड्ढे बन गए थे। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद प्रशासन ने कटाव रोधी कार्य कराया था।
हाल के दिनों में पुल के पाया संख्या-5 के धंसने की जानकारी भी सामने आई थी। अब एक के बाद एक नए गैप और दरारें मिलने से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। प्रशासन ने कहा है कि तकनीकी विशेषज्ञों की अंतिम रिपोर्ट आने तक सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी लगातार जारी रहेगी।
स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता
पुल से रोजाना गुजरने वाले लोगों का कहना है कि दरारों की खबर के बाद लोगों में भय बढ़ गया है। कई वाहन चालक अब वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि पुल की विस्तृत तकनीकी जांच सार्वजनिक की जाए और यदि जरूरत पड़े तो स्थायी मरम्मत कार्य जल्द शुरू किया जाए।
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है।