बिहार

PMCH Negligence – इलाज में देरी से किशोर की मौत, नौ कर्मियों से जवाब तलब

PMCH Negligence – पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में एक घायल किशोर की इलाज के दौरान हुई मौत के मामले ने अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट में कई स्तरों पर लापरवाही के संकेत मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने संबंधित चिकित्सकों और स्वास्थ्य प्रबंधकों से स्पष्टीकरण मांगा है। सभी संबंधित अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है।

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सड़क हादसे के बाद अस्पताल पहुंचा था किशोर

जानकारी के अनुसार, 5 जून की सुबह पटना के आनंदपुरी इलाके में रहने वाला 16 वर्षीय अमन कुमार गुप्ता साइकिल से जा रहा था। इसी दौरान जेपी पथ पर एक अज्ञात वाहन की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उसे तत्काल पीएमसीएच ले जाया गया।

हादसे में उसके बाएं पैर की कई हड्डियां टूट गई थीं, जबकि सिर और नाक पर भी गंभीर चोटें आई थीं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

उपचार शुरू होने से पहले बिगड़ी स्थिति

मामले में सामने आए आरोपों के अनुसार, घायल किशोर को काफी समय तक ट्रॉली पर ही रखा गया। बताया गया कि चिकित्सा प्रक्रिया शुरू करने में देरी हुई और संबंधित टीम परिजनों के पहुंचने की प्रतीक्षा करती रही। इस दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने से उसकी स्थिति गंभीर होती गई।

परिजनों का कहना है कि यदि समय पर इलाज शुरू किया जाता तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी।

अस्पताल प्रशासन ने गठित की जांच समिति

मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएमसीएच प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए थे। अस्पताल अधीक्षक की ओर से पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया, जिसे पूरे घटनाक्रम की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।

इस समिति की अध्यक्षता स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की प्राध्यापक डॉ. मीनू शरण ने की। समिति ने अस्पताल के विभिन्न विभागों से जानकारी एकत्र कर घटना के दौरान मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की।

जांच रिपोर्ट के बाद जारी हुए नोटिस

जांच पूरी होने के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट अस्पताल प्रशासन को सौंप दी। रिपोर्ट में कुछ चिकित्सकों और स्वास्थ्य प्रबंधकों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। इसके आधार पर सात डॉक्टरों और दो स्वास्थ्य प्रबंधकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

संबंधित कर्मियों से पूछा गया है कि घायल मरीज के उपचार के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए और आपात स्थिति में उनकी भूमिका क्या रही। प्रशासन ने निर्धारित समय सीमा के भीतर लिखित जवाब मांगा है।

जिन अधिकारियों से मांगा गया स्पष्टीकरण

अस्पताल प्रशासन द्वारा जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें सर्जरी विभाग और न्यूरो सर्जरी विभाग से जुड़े चिकित्सक, ट्रायज इकाई के अधिकारी और स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। जांच समिति ने इन सभी की जिम्मेदारियों और घटनाक्रम में उनकी भूमिका का अलग-अलग मूल्यांकन किया है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्राप्त जवाबों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो नियमानुसार अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

चिकित्सा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन उपचार व्यवस्था की कार्यक्षमता पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटना के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और समय पर चिकित्सा सहायता जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

फिलहाल प्रशासनिक जांच जारी है और सभी संबंधित पक्षों से जवाब मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि मरीजों को बेहतर और समयबद्ध चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है।

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