Srijan Scam – तेजस्वी ने नौ साल बाद भी कार्रवाई पर उठाए सवाल
Srijan Scam – बिहार के चर्चित सृजन घोटाले को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं। रविवार को जारी बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि करीब नौ साल पहले सामने आए इस मामले में अब तक घोटाले की पूरी रकम और उससे जुड़े लोगों की जवाबदेही स्पष्ट नहीं हो सकी है। तेजस्वी ने कहा कि सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े इस मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर कई सवाल अब भी बने हुए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए सरकार पर राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।

तेजस्वी ने सरकार और जांच एजेंसियों पर साधा निशाना
तेजस्वी यादव ने अपने बयान में दावा किया कि सरकारी खजाने से करीब 5,500 करोड़ रुपये की रकम कथित तौर पर नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों से जुड़े लोगों के निजी खातों में पहुंचाई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जांच के दौरान कुछ वरिष्ठ भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के कथित संबंधों से जुड़े साक्ष्य सामने आए थे, लेकिन जांच एजेंसियों ने उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। हालांकि, ये आरोप तेजस्वी यादव की ओर से लगाए गए हैं और उनके बयान में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि यहां उपलब्ध तथ्यों से नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि मामले को सामने आए लगभग नौ वर्ष हो चुके हैं, लेकिन कथित तौर पर निकाली गई रकम का पूरा हिसाब सार्वजनिक नहीं हुआ है। तेजस्वी ने इसी मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा पर भी राजनीतिक हमला किया और तंज भरे अंदाज में कहा कि घोटाले के आरोपी आराम कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी साझा किया बयान
तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक एक्स खाते पर सृजन घोटाले से जुड़ा लंबा बयान साझा किया। इसमें उन्होंने घोटाले के सामने आने की तारीख का उल्लेख करते हुए जांच की प्रगति पर सवाल उठाया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े नेताओं, मंत्रियों और अधिकारियों के करीबियों के खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर किए जाने का आरोप लगाया।
अपने पोस्ट में तेजस्वी ने जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि कथित घोटाले से जुड़े मामलों में पर्याप्त जवाबदेही तय नहीं हुई। उन्होंने इसी के साथ भाजपा पर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उनका बयान राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया है।
2017 में सामने आया था मामला
सृजन घोटाले का मामला वर्ष 2017 में उस समय सामने आया, जब बांका और भागलपुर के कोषागार से सरकारी धन के कथित तौर पर सृजन महिला विकास समिति लिमिटेड से जुड़े खातों में ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई थी। शुरुआती जांच में सरकारी राशि के हस्तांतरण और उसके इस्तेमाल को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में वर्ष 2003-04 से 2017 के बीच सरकारी रकम के सृजन संस्था से जुड़े खातों में भेजे जाने की बात सामने आई थी। मामला उजागर होने के बाद पहले स्थानीय पुलिस स्तर पर जांच शुरू हुई। बाद में इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी गई।
घोटाले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को दिए जाने के बाद विभिन्न लेनदेन और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की गई। सृजन मामले में सरकारी विभागों, बैंकों और संस्था से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच लंबे समय तक चर्चा में रही है।
तेजस्वी यादव के ताजा बयान ने एक बार फिर इस पुराने मामले को बिहार की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। अब उनके आरोपों पर सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की ओर से मामले की मौजूदा स्थिति को लेकर सामने आने वाली जानकारी पर नजर रहेगी।